छत्रपति संभाजीनगर में डॉक्टरों ने निकाली मशाल रैली, सातारा केस को लेकर सरकार के खिलाफ किया हल्लाबोल

Chhatrapati Sambhajinagar: सातारा जिले के फलटण में महिला डॉक्टर की खुदकुशी के बाद छत्रपति संभाजीनगर में 200 से अधिक डॉक्टरों ने मशाल रैली निकाली। इस दौरान डॉक्टरों ने नारेबाजी भी की।
Chhatrapati Sambhajinagar Doctors Torch Rally
छत्रपति संभाजीनगर में प्रदर्शन करते डॉक्टर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Chhatrapati Sambhajinagar Doctors Torch Rally: सातारा जिले के फलटण में महिला चिकित्सक की खुदकुशी के बाद सरकारी डॉक्टरों में बढ़ते तनाव, अत्यधिक काम व प्रशासनिक उत्पीड़न की सच्चाई सामने सामने आई है। इसे पूरे सिस्टम की विफलता करार देते हुए कार्य बोझ करने व विभिन्न मांगों के समर्थन में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएम), मार्ड व मैग्मो संगठन के बैनर तले छत्रपति संभाजीनगर में मशाल रैली निकाली गई।

करीब 200 डॉक्टरों ने क्रांति चौक में धरना देकर मांगें रखीं। चेताया कि यदि सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। मशाल रैली की शुरुआत शाम सात बजे आईएमए हॉल से हुई जिसका समापन क्रांति चौक में हुआ।

हाथों में बैनर लेकर की नारेबाजी

डॉक्टरों ने हाथों में मशाल लेकर 'सेव द वॉरियर्स' व 'स्टॉप हरेसिंग डॉक्टर्स' जैसे बैनर और नारों से माहौल गूंजा दिया। अनुशासित व शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुए मोर्चे के अंत में डॉक्टरों ने दो मिनट मौन रखकर फलटण में मृतक महिला चिकित्सक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

डॉ. अनुपम टाकलकर की अगुवाई में निकाले गए मोर्चे में डॉ. योगेश लक्कस, डॉ. यशवंत गाड़े डॉ. शिवाजी पोले, डॉ. संभाजी चिंतले डॉ. असावरी टाकलकर, डॉ. अंजलि गाड़े डॉ. बाबासाहेब उनवणे, डॉ. संजन खंडागले, डॉ. संदीपन काले, डॉ. प्रशांन बड़े, डॉ. नागेश सावरगांवकर, डॉ. प्रकाश साबले, डॉ. साजिद शेख, डॉ. अपण जक्कल, डॉ. सचिन पाटील, डॉ. स्वप्निल केंद्रे, डॉ. दीपक कव्हर, डॉ. चैतन्य डाव आदि चिकित्सक शामिल हुए।

डॉक्टरों को डयूटी के दौरान मिले सुरक्षा

फलटण मामले की इन-कैमरा सुनवाई करने, सरकारी डॉक्टरों पर बढ़ता कार्यभार व मानसिक उत्पीड़न रोकने, डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाने, डॉक्टरों को सुरक्षित व सम्मानजनक कार्य वातावरण प्रदान करने, मामले की तीव्र गति न्यायालय में सुनवाई कर पीड़िता को न्याय दिलाने का आग्रह किया गया।

प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए आंदोलनकारियों ने कहा कि यदि सुधार नहीं हुआ, तो डॉक्टरों का मनोबल टूट जाएगा व स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा जाएगी।

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