
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Chhatrapati Sambhajinagar Municipal Election: छत्रपति संभाजीनगर भाजपा और शिंदे गुट की युति में सब कुछ ठीक नहीं होने का संकेत एक बार फिर उम्मीदवार चयन प्रक्रिया से सामने आया है।
भाजपा द्वारा टिकट से वंचित किए गए दस नाराज इच्छुक कार्यकर्ताओं को शिंदे गुट ने तत्काल उम्मीदवार घोषित कर अपने खेमे में शामिल कर लिया। इस घटनाक्रम से स्थानीय राजनीति में हलचल मच गई है और युति के भीतर चल रहे अंतर्विरोध खुलकर सामने आ गए हैं।
मनपा चुनाव की पृष्ठभूमि में भाजपा में उम्मीदवार बनने के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आए थे। कई निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने इच्छुक के रूप में पार्टी के सामने आवेदन दिए और साक्षात्कार भी हुए।
वरिष्ठ स्तर से सकारात्मक संकेत मिलने के कारण कई कार्यकर्ताओं को टिकट लगभग तय होने का भरोसा भी दिया गया था। हालांकि अंतिम चरण में युति के समीकरण बदलने से कुछ नामों को अचानक बाहर कर दिया गया।
इससे संबंधित कार्यकर्ताओं में तीव्र असंतोष फैल गया। इस घटनाक्रम सेहलचल मच गई है और युति के भीतर चल रहे अंतर्विरोध खुलकर सामने आ गए हैं।
भाजपा में पनपी इसी नाराजगी का फायदा उठाते हुए शिंदे गुट ने कदम बढ़ाया, भाजपा से टिकट न मिलने वाले दस कार्यकर्ताओं को सीधे उम्मीदवार घोषित कर शिंदे गुट ने अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने की रणनीति अपनाई।
सूत्रों के अनुसार, इन उम्मीदवारों को जिताने की जिम्मेदारी पालकमंत्री संजय शिरसाट के गुट को सौपी गई है। इस पूरे घटनाक्रम में भाजपा के मंत्री अतुल सावे की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
भाजपा छोड़कर शिंदे गुट में शामिल होने वालों में लता दलाल, कुणाल मराठे, सुनीता अरविंद डोणगांवकर, भावेश सराफ, बालासाहेब गायकवाड और गीता आयार्च सहित अन्य कुछ कार्यकर्ता शामिल, हैं। ये सभी अब शिंदे गुट के मंच से चुनावी मैदान में उतरेंगे।
खास बात यह है। कि ये कार्यकर्ता लंबे समय से भाजपा में सक्रिय थे, लेकिन युति की राजनीति में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे। इस घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि भाजपा और शिंदे गुट की युति फिलहाल आला नेताओं के स्तर तक ही सीमित नजर आ रही है।
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जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच इसे लेकर असंतोष बना हुआ है। पहले से ही युति को लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी थी और अब उम्मीदवार चयन में हुए इस घटनाक्रम ने पार्टी के लिए नई परेशानी खड़ी कर दी है। आगामी चुनाव में इस आंतरिक असंतोष का असर परिणामों पर पड़ेगा या नहीं, इस पर पूरे राजनीतिक गलियारे की नजर टिकी हुई है।






