मशाल चिन्ह को लेकर छिड़ा सियासी संग्राम, अंबादास दानवे ने चुनाव कार्यालय में अधिकारियों को घेरा

Municipal Elections: में शिवसेना (UBT) की उम्मीदवार को 'मशाल' चिन्ह न मिलने पर अंबादास दानवे ने मोर्चा खोल दिया। HC के स्पष्ट आदेश के बाद अधिकारियों की ढिलाई ने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए।
Political battle erupts over the torch symbol; Ambadass Danve confronts officials at the election office.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Shiv Sena UBT Candidate Symbol Issue: छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका चुनाव की सरगर्मियों के बीच एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक विवाद सामने आया है।

प्रभाग क्रमांक 04 से अनुसूचित जाति वर्ग की शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी की अधिकृत उम्मीदवार सावित्रीबाई हिरालाल वाणी को 'मशाल' चुनाव चिन्ह आवंटित नहीं किए जाने पर हंगामा खड़ा हो गया है। इस मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब यह पता चला कि उच्च न्यायालय ने पहले ही इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी कर दिए थे।

अंबादास दानवे ने निर्वाचन कार्यालय में किया जवाब तलब

महाराष्ट्र के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ शिवसेना नेता अंबादास दानवे ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप किया है। वे शनिवार को स्वयं निर्वाचन निर्णय अधिकारी के कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों से तीखे सवाल किए। दानवे ने आरोप लगाया कि जब उच्च न्यायालय का स्पष्ट आदेश मौजूद है, तो निर्वाचन तंत्र जानबूझकर विलंब क्यों कर रहा है? उन्होंने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि न्यायालय के आदेशों का पालन करना एक संवैधानिक दायित्व है, जिसकी अवहेलना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

आयुक्त और मुख्य निर्वाचन आयुक्त से सीधा संवाद

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए अंबादास दानवे ने राज्य के मुख्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश वाघमारे और मनपा आयुक्त जी. श्रीकांत से फोन पर बातचीत की। उन्होंने अधिकारियों को अवगत कराया कि चुनाव चिन्ह मिलने में हो रही देरी के कारण उम्मीदवार का प्रचार कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है। दानवे ने मांग की कि उच्च न्यायालय के आदेश पर तुरंत अमली जामा पहनाया जाए और संबंधित अधिकारियों को इस लापरवाही के लिए निर्देशित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है।

शिवसेना (UBT) की आंदोलन की चेतावनी

ठाकरे पार्टी की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि तत्काल प्रभाव से सावित्रीबाई वाणी को 'मशाल' चिन्ह प्रदान नहीं किया गया, तो पार्टी सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी।

दानवे ने कहा कि प्रशासन की यह सुस्ती जानबूझकर विपक्षी उम्मीदवारों को परेशान करने के लिए की जा रही है। अब सभी की निगाहें निर्वाचन आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि यह मामला लोकतांत्रिक मूल्यों और न्यायिक गरिमा से जुड़ा हुआ है।

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