
महाराष्ट्र चुनाव आयोग (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Municipal Council Election Rules: नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में भले ही उम्मीदवारों को भारी खर्च करने की छूट हो, लेकिन चुनाव आयोग द्वारा जारी की गई नई दर सूची से अब खर्च में पारदर्शिता बनाए रखना अनिवार्य हो गया है। आयोग ने पानी, नाश्ता, भोजन, बैनर, बैंजो, जनसंपर्क सामग्री सहित सभी प्रचार सामग्रियों के निश्चित दर घोषित कर दिए हैं।
उम्मीदवारों को अपने खर्च का रजिस्टर रसीद के साथ नियमित रूप से संबंधित कार्यालय में जमा करना होगा। 4 नवंबर को चुनाव घोषित होते ही आचार संहिता लागू हो गई। 10 नवंबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू हुई है, और 17 नवंबर तक उम्मीदवारों द्वारा नामांकन दाखिल किए जाने के बाद होने वाला हर खर्च चुनाव खर्च में शामिल किया जाएगा। आयोग ने राजनीतिक दलों से चर्चा के बाद जिलेवार ये दरें तय की हैं।
चुनाव आयोग के अनुसार सभा या रैली में अनावश्यक खर्च, भड़कीला प्रचार, बैनरबाजी और पैसे की फिजूलखर्ची रोकने के लिए आयोग वीडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से कड़ी नजर रखेगा। तय दरों से अधिक खर्च करने पर उम्मीदवार के खिलाफ सीधी कार्रवाई की जाएगी, ऐसा प्रशासन ने स्पष्ट किया है।
पानी की बोतल : 13 रुपये
नाश्ता: 20 रुपये
हल्का भोजन/भात की थाली: 100 रुपये
शाकाहारी भोजन: 160 रुपये
मांसाहारी भोजन: 250 रुपये
चाय/कॉफी: 10 रुपये
शीतपेय/जूस: 15 रुपये
बैंड–ताशा दल (5 सदस्य): प्रति घंटा 1,000 रुपये, प्रतिदिन 6,000 रुपये, 10 सदस्यों के लिए दोगुना शुल्क
बैंजो पार्टी (10 सदस्य): प्रति घंटा 6,000 रुपये, प्रतिदिन 21,000 रुपये
यह भी पढ़ें – दो टुकड़ों में बंट जाएगा महाराष्ट्र…2027 से पहले अलग होगा विदर्भ! बड़े आंदोलन का हुआ ऐलान
स्वागत गेट: 1,200 रुपये
गादी: 15 रुपये
मंच: 100 रुपये
शामियाना: 10 रुपये प्रति वर्ग फुट
घुमट: 35 रुपये प्रति वर्ग फुट
पुष्पगुच्छ: 200 रुपये
स्टैंड फैन: 250 रुपये
बड़ा स्टैंड फैन: 300 रुपये
साउंड सिस्टम: 1,500 रुपये
बैनर: 18 रुपये प्रति फुट
झंडे: 25 रुपये
कपड़े की टोपी: 25 रुपये प्रति पीस
नगर परिषद
A श्रेणी: नगराध्यक्ष 15 लाख, पार्षद 5 लाख
B श्रेणी: नगराध्यक्ष 11.25 लाख, पार्षद 3.50 लाख
C श्रेणी: नगराध्यक्ष 7.5 लाख, पार्षद 2.50 लाख
नगर पंचायत
नगराध्यक्ष 6 लाख, पार्षद 2.25 लाख
उम्मीदवारों को निर्धारित दरों के अनुसार ही खर्च दाखिल करना होगा और रसीद सहित रजिस्टर नियमित रूप से जमा करना अनिवार्य है।
– डॉ. विकास खंदारे, सहआयुक्त






