चुनाव आते ही शुरू होती है नेताओं की बयानबाज़ी, नागरिकों की मूलभूत समस्याओं पर ध्यान नहीं
Public Issues: अमरावती मनपा चुनाव के दौरान नेताओं द्वारा जनता की मूलभूत समस्याओं को नजरअंदाज कर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करने की रणनीति, जिसमें चुनाव पूर्व सक्रिय कार्यकर्ताओं और लंबित परियोजनाओं क
- Written By: आंचल लोखंडे
Public Issues:अमरावती मनपा चुनाव (सोर्सः सोशल मीडिया)
Amravati Politician Statements: अमरावती जिले में चुनाव के पूर्व ही बड़े जनप्रतिनिधियों द्वारा जनता की ज्वलंत समस्याओं पर चर्चा करने की बजाय खुद को श्रेष्ठ दिखाने के लिए एक-दूसरे पर जमकर बयानबाज़ी शुरू कर दी जाती है। जबकि नेताओं को नागरिकों की मूलभूत समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन जाति-धर्म और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप में पूरा चुनावी समय व्यतीत हो जाता है। इस कारण जनता की समस्याएं अक्सर अनसुलझी रह जाती हैं।
वर्तमान मनपा चुनाव की सरगर्मी में भी जनता की समस्याओं, मूलभूत सेवाओं और अन्य अहम मुद्दों पर चर्चा के बजाय नेतागण आपसी आरोप-प्रत्यारोप में उलझे हुए हैं। इस तरह की नूरा कुश्ती का पैटर्न हर चुनाव में देखा जाता है और यह रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती है।
एक-दूसरे पर आरोप
चिर परिचित लोकप्रिय नेता और जनप्रतिनिधि चुनाव के दौरान जनता की समस्याओं को छोड़कर एक-दूसरे पर आरोप लगाने में ही लग जाते हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से मुद्दों को उलझा कर जनता भ्रमित होती है। लंबे समय से रुके हुए शहर के मुद्दे, जैसे भुयारी गटर योजना, रेलवे पुल की समस्या और बढ़े हुए टैक्स, आज भी हल नहीं हुए हैं। इन परियोजनाओं की धीमी प्रगति और उच्च लागत के कारण शहरवासियों को प्रत्यक्ष आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सम्बंधित ख़बरें
विदर्भ का नंदनवन चिखलदरा बना पर्यटकों की पहली पसंद, वीकेंड पर वन-वे ट्रैफिक लागू
डॉ. सुरेश हावरे बनेंगे राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO? अमरावती से है खास नाता, जानें कौन है ये दिग्गज साइंटिस्ट
अंजनगांव सुर्जी नगर परिषद की राजनीति में नया मोड़, कांग्रेस महासचिव ने शहराध्यक्ष पर लगाए गंभीर आरोप
अमरावती में सनसनी: लड़की को ब्रेसलेट देने पर युवक की गर्दन पर उस्तरे से हमला
सफाई ठेकेदारों की नेताओं से निकटता
शहर के विभिन्न प्रभागों में सफाई की समस्या गंभीर है। अधिकांश ठेकेदार नेताओं के करीबी और सक्रिय कार्यकर्ता होने के कारण आंदोलन केवल नौटंकी का रूप ले लेता है। अंत में जिम्मेदारी अधिकारियों पर डालकर समस्या टाल दी जाती है।
ये भी पढ़े: प्रभाग की जनता की सेवा के लिए हमेशा उपलब्ध, क्षेत्र की समस्याओं को हल करने को प्राथमिकता: परमार
चुनाव पूर्व सक्रिय कार्यकर्ता
चुनाव से पहले कार्यकर्ता वोट बटोरने और जनता को लुभाने के लिए सक्रिय दिखाई देते हैं। लेकिन चुनाव समाप्त होते ही ये गायब हो जाते हैं। कई उम्मीदवार केवल जुबानी रूप से ही जनता की समस्याओं को हल करने का वादा करते हैं। जनता यह जानने की कोशिश कर रही है कि ऐसे चुने गए जनप्रतिनिधि वाकई में समस्याओं का समाधान कर पाएंगे या नहीं।
