चिखला में महिला पर अमानवीय हमले के विरोध में शिवप्रेमी संगठनों का आंदोलन, जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष विरोध
Malegaon Protest: चिखला में महिला पर अमानवीय हमले के विरोध में मालेगांव में शिवप्रेमी संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।
- Written By: आंचल लोखंडे
Chikhla woman assault case (सोर्सः सोशल मीडिया)
Chikhla Woman Assault Case: चिखला में छत्रपती शिवाजी महाराज के स्मारक निर्माण को लेकर हुए विवाद में संजीवनी वाघ नामक महिला के साथ की गई अमानवीय मारपीट के खिलाफ शहर व तहसील स्तर पर शिवप्रेमी संगठनों, विभिन्न संस्थाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तीव्र शब्दों में निषेध व्यक्त किया। इस घटना के विरोध तथा दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर मंगलवार को मालेगांव स्थित अपर जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने अपर जिलाधिकारी देवदत्त केकान को मांगों का निवेदन सौंपा। यह आंदोलन साथी प्रतिष्ठान, संभाजी ब्रिगेड, मध्यवर्ती शिवजयंती उत्सव समिति, अखिल भारतीय मराठा महासंघ, शिवप्रेमी नागरिकों तथा विभिन्न स्थानीय संस्थाओं और संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
निवेदन में कहा गया है कि शिवजयंती के अगले ही दिन, 20 फरवरी को चिखला में स्मारक विवाद के चलते गांव के सरपंच तथा एक समूह द्वारा संजीवनी वाघ के साथ निर्दयतापूर्वक मारपीट की गई। आरोप है कि समूह द्वारा की गई इस पिटाई में महिला के कपड़े तक फट गए। इस घटना में पुलिस प्रशासन के कुछ लोगों की संलिप्तता होने की भी जानकारी सामने आई है।
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निंदनीय घटना
निवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि जिस दिन शिवजयंती के अवसर पर शिवाजी महाराज की महिला नीति और नारी सम्मान के विचारों का सर्वत्र प्रचार-प्रसार किया जा रहा था, उसी दौरान प्रगतिशील महाराष्ट्र में इस प्रकार की घटना होना राज्य और महाराष्ट्र धर्म पर कलंक के समान है। गत कुछ वर्षों से सामाजिक प्रश्नों के समाधान में हो रही देरी के कारण विभिन्न समाजों और जातियों के बीच टकराव की स्थिति बन रही है, जिससे जातीय और सामाजिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसी मानसिकता से जन्मी यह घटना निंदनीय है तथा शिव-फुले-शाहू-आंबेडकर द्वारा स्थापित समता की विचारधारा और संतों के माध्यम से निर्मित महाराष्ट्र धर्म के प्रतिकूल है।
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पुलिसकर्मियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि इस प्रकरण में शामिल सभी दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और आरोपियों को संरक्षण देने वाले पुलिसकर्मियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि कार्रवाई में देरी हुई तो और भी तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा। इस आंदोलन में राजेंद्र भोसले, अनिल पाटील, नगरसेवक दिनेश ठाकरे, नरेंद्र पवार, रामदास बोरसे, भरत पाटील, अमोल निकम, जितेंद्र देसले, जगदीश खैरनार, क्रांति पाटील, संजय महाले, श्याम देवरे, हरिदादा निकम, मनोज पवार, मनीष पाटील, शरद बच्छाव, करण भोसले, किरण पाटील, अमोल चौधरी, दीपक पाटील सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे।
