अमरावती के किसानों ने पूरी की 83% खरीफ बुआई, अब अच्छी बारिश का इंतजार
Amravati Kharif Sowing : अमरावती जिले में खरीफ सीजन 2026 के तहत 6।82 लाख हेक्टेयर लक्ष्य में से 5।66 लाख हेक्टेयर यानी 83% क्षेत्र में बुआई पूरी हो चुकी है। बारिश की कमी से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
- Written By: आंचल लोखंडे
अमरावती खरीफ बुआई - फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
Agriculture Department Amravati: अमरावती जिले में मानसून ने अब तक अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ा है, जिससे इस साल खरीफ सीजन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। हालांकि, शुरुआती बारिश से जमीन में आई नमी का फायदा उठाते हुए किसानों ने बिना समय गंवाए बुआई के काम को तेजी से निपटाया है। देखते ही देखते जिले के 5 लाख 66 हजार 607 हेक्टेयर यानी करीब 83 प्रतिशत क्षेत्र में खरीफ की बुआई पूरी हो चुकी है।
यूं तो इस साल भी किसानों ने पारंपरिक नगदी फसलों जैसे कपास, सोयाबीन और अरहर (तूर) को ही सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी है, लेकिन बदलते मौसम को देखते हुए मक्के की बुआई में भी काफी बढ़ोतरी देखी गई है। अब बुआई के बाद बारिश थम जाने से किसानों की चिंता बढ़ गई है और अंकुरित हो चुकी फसलों को बचाने के लिए उनकी नजरें फिर से आसमान की ओर टिकी हैं।
लक्ष्य: कृषि विभाग के वर्ष 2026-27
कृषि विभाग का वर्ष 2026-27 का के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जिले में इस साल कुल 6 लाख 82 हजार 992 हेक्टेयर क्षेत्र पर खरीफ फसलों की बुआई का लक्ष्य रखा गया था। इसमें से 83% क्षेत्र पर बुआई पूरी हो चुकी है। कृषि विभाग का अनुमान है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है, तो शेष बचे क्षेत्रों में भी बुआई का काम जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
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कपास बनी पहली पसंद
इस आंकड़े से साफ है कि जिले के किसानों ने इस बार भी कपास को अपनी पहली पसंद बनाया है, जबकि सोयाबीन दूसरे स्थान पर काबिज है। अब देखना यह है कि वरुण देव कब मेहरबान होते हैं और किसानों की इस मेहनत को नया जीवन देते हैं।
मौसम पर ही टिका खरीफ का भविष्य
कृषि विभाग ने किसानों को मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर ही खेती के काम करने और फसलों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है। वर्तमान में बारिश के थम जाने से खरीफ फसलों का पूरा दारोमदार अब आगामी बारिश पर ही निर्भर है।
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कई इलाकों में फसलों के अंकुर तो निकल आए हैं, लेकिन उनकी आगे की वृद्धि के लिए लगातार पानी की आवश्यकता है। यदि बारिश होने में और अधिक देरी होती है, तो नई फसलों के सूखने का खतरा पैदा हो सकता है। इसके विपरीत, एक जोरदार बारिश बच्ची हुई बुआई को पूरा कर खरीफ सीजन को नई गति दे सकती है।
