Akola News: मोर्णा नदी विकास परियोजना DPR में खामियां, केंद्र से मंजूरी फिर अटकी
Akola Riverfront Project: अकोला की मोर्णा नदी विकास परियोजना संशोधित DPR में तकनीकी खामियों के कारण केंद्र सरकार से मंजूरी नहीं पा सकी। जानें परियोजना में देरी की पूरी वजह।
- Written By: आंचल लोखंडे
मोर्णा नदी विकास परियोजना- फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
Morna River Development Project: अकोला शहर के पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास को नई पहचान देने वाली मोर्णा नदी विकास परियोजना पिछले कई वर्षों से केवल कागजों तक सीमित है। वर्ष 2018-19 से परियोजना के धरातल पर उतरने का इंतजार जारी है। वहीं, वर्ष 2024 में बढ़ी हुई लागत के आधार पर तैयार की गई संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में भी खामियां पाए जाने के कारण केंद्र सरकार से अब तक मंजूरी नहीं मिल सकी है। अहमदाबाद की साबरमती नदी की तर्ज पर मोर्णा नदी का विकास करने की योजना बनाई गई थी।
इसके तहत वर्ष 2018 में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर राज्य नदी संरक्षण समिति को भेजी गई थी। समिति के सुझावों के आधार पर इसमें संशोधन कर दोबारा रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। खास बात यह रही कि 2018-19 के राज्य बजट में इस परियोजना के लिए 15 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया था। इसके बावजूद तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
मोर्णा नदी विकास योजना पर संकट
2024 में मांगा गया था संशोधित डीपीआर जून 2024 में आयोजित ऑनलाइन बैठक में राज्य नदी संरक्षण समिति ने निर्माण लागत में वृद्धि को देखते हुए अकोला मनपा को संशोधित लागत के अनुसार नया डीपीआर तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। मनपा ने नया प्रस्ताव तैयार कर भेजा, लेकिन उसमें भी तकनीकी कमियां सामने आने से परियोजना फिर अटक गई।
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मंजूरी मिलने पर मिलेंगी ये सुविधाएं
परियोजना को स्वीकृति मिलने पर मोर्णा नदी क्षेत्र में कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनमें प्रमुख रूप से नदी के बीच 40 मीटर चौड़ा कांक्रीटयुक्त वाटर चैनल, नदी के दोनों किनारों पर 20-20 मीटर चौड़े पैदल मार्ग, निर्धारित स्थानों पर घाट और प्रवेश मार्ग, नदी किनारे स्विमिंग पूल, खेल परिसर और जलक्रीड़ा केंद्र सहित साप्ताहिक बाजार, सौंदर्याकरण उद्यान तथा विश्राम केंद्र का निर्माण किए जा सकेंगे।
प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट की नियुक्ति भी अटकी
परियोजना के आगे के नियोजन के लिए मनपा प्रशासन ने प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (पीएमसी) की नियुक्ति हेतु ई-टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। हालांकि, इस प्रक्रिया में केवल एक ही निविदा प्राप्त हुई। इसी दौरान डीपीआर में तकनीकी खामियां सामने आने के बाद पूरी प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है।
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डीपीआर की खामियां बनीं सबसे बड़ी बाधा
निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों को ध्यान में रखते हुए मनपा ने संशोधित डीपीआर तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा था। लेकिन रिपोर्ट में तकनीकी त्रुटियां पाए जाने के कारण उसे मंजूरी नहीं मिल सकी। अब परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए डीपीआर में आवश्यक सुधार कर दोबारा प्रस्तुत किए जाने की प्रक्रिया पर जोर दिया जा रहा है।
