

Nagpur Orange Farming: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि विदर्भ के कृषि क्षेत्र के सामने अनेक चुनौतियां हैं, लेकिन वैज्ञानिक शोध, आधुनिक तकनीक और रोगमुक्त पौधों के उत्पादन के जरिए इन समस्याओं का प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी शोध संस्थान और नर्सरी संचालक मिलकर किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध कराएं तो नागपुर के संतरे को नई वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ विदर्भ की कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल सकती है।
गडकरी आईसीएआर के केंद्रीय नींबूवर्गीय फल अनुसंधान संस्थान (सीसीआरआई) द्वारा केंद्र सरकार की 'क्लीन प्लांट' पहल के तहत आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. दिलीप कुमार घोष, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. ए.के. दास, सुधीर दिवे तथा असम, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, मणिपुर सहित 12 राज्यों के कृषि अधिकारी, वैज्ञानिक और विशेषज्ञ उपस्थित थे।
गडकरी ने कहा कि विदर्भ में कृषि विकास के लिए जल प्रबंधन, मृदा परीक्षण और आधुनिक तकनीकों का उपयोग आवश्यक है, लेकिन इन सबसे अधिक महत्वपूर्ण भूमिका रोगमुक्त और उच्च गुणवत्ता वाले पौधों की है। यदि किसानों को प्रमाणित और स्वस्थ पौधे उपलब्ध होंगे तो उत्पादन बढ़ेगा, फसलों में रोगों का प्रकोप कम होगा और खेती अधिक लाभकारी बनेगी।
उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रही है, लेकिन विदर्भ की भौगोलिक और कृषि परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय स्तर पर अनुसंधान को और मजबूत करने की जरूरत है। शोध का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे, इसके लिए वैज्ञानिकों, कृषि विश्वविद्यालयों और सरकारी संस्थानों को समन्वय के साथ काम करना होगा।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकारी संस्थानों की जिम्मेदारी केवल शोध तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले, रोगमुक्त पौधे और बीज तैयार करने के साथ-साथ किसानों और नर्सरी संचालकों को प्रशिक्षण भी देना चाहिए। यदि नर्सरियों को वैज्ञानिक मार्गदर्शन मिलेगा तो वे बेहतर गुणवत्ता के पौधे तैयार कर सकेंगी, जिससे किसानों की लागत कम होगी और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
गडकरी ने कहा कि नागपुर का संतरा पहले से ही देश और विदेश में अपनी अलग पहचान रखता है। यदि रोगमुक्त पौधों के उत्पादन, आधुनिक खेती और वैज्ञानिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जाए तो संतरा विदर्भ की कृषि अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत आधार बन सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी, निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र के कृषि विकास को नई दिशा मिलेगी।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 'क्लीन प्लांट' जैसी पहल भविष्य में संतरा उत्पादकों के लिए बेहद लाभकारी साबित होगी और विदर्भ को देश के अग्रणी बागवानी क्षेत्रों में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।