Uttarayan Festival:अकोला में मकर संक्रांति (सोर्सः सोशल मीडिया)
Makar Sankranti Akola: मकर संक्रांति के अवसर पर सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करने के साथ ही महानगर और जिले में उत्सव का माहौल छा गया। उत्तरायण के सूर्य की पहली किरण के स्वागत में बच्चों और युवाओं ने पतंग उड़ाई, वहीं महिलाओं ने हल्दी-कुमकुम लगाकर तथा वाण (वान) का वितरण कर परंपरागत तरीके से पर्व मनाया। शहर भर में “ढील दे-ढील दे”, “लपेट” और “काटो छे” की आवाज़ें दिन भर गूंजती रहीं।
14 जनवरी को शहर का आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से सजा नजर आया। स्कूलों में अवकाश होने के कारण बड़ी संख्या में बच्चे मैदानों और सड़कों पर पतंग उड़ाते दिखाई दिए। इस बार प्लास्टिक की पतंगों की जगह कागज और कपड़े की पतंगों का चलन अधिक रहा। पतंगबाजों का कहना है कि कागज की पतंग में तान अधिक रहने से वह जल्दी नहीं कटती और उड़ाने में ज्यादा आनंद आता है।
कई बच्चे पतंग उड़ाने के साथ-साथ कटी हुई पतंगें लूटने में भी सक्रिय नजर आए। कुछ बच्चों ने तो शाम तक आठ से दस पतंगें इकट्ठा कर लीं। युवाओं के साथ-साथ बच्चों और बुजुर्गों ने भी पूरे दिन पतंग उड़ाकर मकर संक्रांति का पर्व उत्साहपूर्वक मनाया और उत्तरायण का स्वागत किया।
महानगर और जिले में महिलाओं व युवतियों ने अपने घरों के सामने पतंग, चकरी, तिल-गुड़ के लड्डू, धान और सूर्य के उत्तरायण की आकर्षक रंगोलियां बनाईं। परंपरा के अनुसार रंगोली को शुभ माना जाता है और इसी भावना के साथ मकर संक्रांति पर उत्तरायण का स्वागत किया गया।
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शहर की छतों पर दिव्या कवठेकर, आदित्य सिरसाट, कारुणिक कसबे सहित अनेक युवाओं ने साउंड सिस्टम लगाकर फिल्मी गीतों की धुन पर नाचते-गाते पतंग उड़ाई। “ढील दे-ढील दे रे भैया”, “मेरी जिंदगी कटी पतंग”, “चली-चली रे पतंग मेरी आसमान के पार” जैसे गीतों ने माहौल को और भी रंगीन बना दिया।
मकर संक्रांति पर बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों द्वारा बड़ी संख्या में पतंग उड़ाए जाने से शहर और जिले की गलियों व चौराहों पर मांजा और पतंगों के स्टॉल सजे रहे। पतंग कटने के बाद नई पतंग और मांजा खरीदने के लिए लोग बार-बार स्टॉलों का रुख करते नजर आए। पूरे दिन पतंगबाजी का उत्साह बना रहा।