महार वतन, इमानी वतन जमीनें मूल वतनधारकों को लौटाई जाएं, भीमशक्ति संगठन की मांग

Mahar Watan Land Issue: महार वतन और इमानी वतन जमीनें मूल वतनधारकों को लौटाने की माँग तेज। भीमशक्ति संगठन ने अकोला में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
महार वतन, इमानी वतन जमीनें मूल वतनधारकों को लौटाई जाएं
महार वतन, इमानी वतन जमीनें मूल वतनधारकों को लौटाई जाएं
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Akola Bhimshakti Organization: महाराष्ट्र की सामाजिक और ऐतिहासिक विरासत का अभिन्न हिस्सा रही महार वतन और इमानी वतन जमीनों को मूल वतनधारकों तथा अनुसूचित जाति-जनजाति परिवारों को वापस देने की मांग अब जोर पकड़ रही है। इसी संदर्भ में अकोला जिला भीमशक्ति सामाजिक संगठन और अशोक प्रतिष्ठान, अकोला की ओर से मुख्यमंत्री महाराष्ट्र राज्य को जिलाधिकारी के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपा गया।

इस अवसर पर प्रा. विजय आठवले, प्रा. डॉ. बालकृष्ण खंडारे, अनिल गवई, अनिल तायडे, मधुसूदन भटकर, भूषण गायकवाड, विद्याधर मोहोड, शंकर वानखडे सहित कई पदाधिकारी उपस्थित थे। ज्ञापन निवासी जिलाधिकारी विजय पाटिल को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नाम पर सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया है कि छत्रपति शिवाजी महाराज, छत्रपति शाहू महाराज और ब्रिटिश शासनकाल में ग्रामीण क्षेत्रों की सेवा करने वाले महार समाज तथा अन्य वंचित समुदायों को सेवावतन के रूप में ये जमीनें प्रदान की गई थीं।

जिलाधिकारी के माध्यम से सीएम को सौंपा ज्ञापन

उस समय ये भूमि अनुसूचित जाति-जनजाति समाज के जीवनयापन और सम्मान का मुख्य आधार थीं। लेकिन आज इन जमीनों का अस्तित्व समाप्त होता जा रहा है और कई स्थानों पर निजी व्यक्तियों ने अवैध कब्जा कर लिया है। राज्यसभा सदस्य तथा भीमशक्ति सामाजिक संगठन के संस्थापक चंद्रकांत हंडोरे ने इस विषय पर प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि ये जमीनें मूल मालिकों को लौटाई जाएं। इसी मांग के समर्थन में अकोला जिले से यह ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

संगठन की मुख्य माँगें

  • महाराष्ट्र की महार वतन, इमानी वतन और गायरान जमीनों का सर्वेक्षण कर मूल पंजीयन की जाँच की जाए।
  • मूल वतनधारकों के वारिसों का पंजीयन कर उन्हें हक से जमीन लौटाई जाए।
  • अवैध निर्माण और कब्जे रद्द कर भूमिहीन समाज को पुनर्वसन और न्याय दिया जाए।
  • “महार वतन और इमानी वतन जमीन पुनर्स्थापना आयोग” की स्थापना की जाए।
  • अनुसूचित जाति-जनजाति और वंचित परिवारों को यह जमीनें निःशुल्क हक से दी जाए।
  • जिन गायरान और पडीत जमीनों को अनुसूचित जाति-जनजाति समाज ने वर्षों से खेती कर उपजाऊ बनाया है, उनका मालिकाना हक भी इन्हीं वर्गों को दिया जाए।

विवाद और आक्रोश

ज्ञापन में आगे कहा गया है कि हाल ही में महार वतन जमीनों को कम कीमत पर खरीदने का प्रयास किया गया था। यह मामला उजागर होने पर समाज में तीव्र आक्रोश फैल गया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि इस प्रकार की जमीनों की लूट पर सरकार तुरंत कार्रवाई करे; अन्यथा राज्यभर में व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा। ज्ञापन में कहा गया कि संविधान द्वारा प्रदत्त समानता और मालिकाना हक केवल कागजों तक सीमित न रहकर व्यवहार में दिखाई देना चाहिए। भीमशक्ति सामाजिक संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर विलंब किया, तो महाराष्ट्रभर में बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा और भूमिहीन समाज को न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।

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