खामगांव कृषि उपज मंडी के सभापति सुभाष पेसोडे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव मंजूर
Subhash Pesode: खामगांव कृषि उपज मंडी के सभापति सुभाष पेसोडे के खिलाफ 12 संचालकों ने अविश्वास प्रस्ताव पारित किया। मतदान, नाटकीय “अपहरण” प्रकरण और राजनीतिक हलचल से शहर में चर्चा तेज है।
- Written By: आंचल लोखंडे
खामगांव कृषि उपज मंडी के सभापति सुभाष पेसोडे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Khamgaon Agriculture Market: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के सुभाष पेसोडे खामगांव कृषि उपज मंडी के सभापति थे, लेकिन पिछले कुछ समय से संचालकों के बीच उनके कार्यप्रणाली को लेकर नाराज़गी बढ़ रही थी। यह जानकारी जैसे ही विधायक आकाश फुंडकर तक पहुंची, उन्होंने मौके का लाभ उठाते हुए रणनीति बनाना शुरू किया।
इसी के तहत 3 नवंबर को मंडी के 18 संचालकों में से 12 संचालकों ने जिलाधिकारी बुलढाणा के पास सभापति पेसोडे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दाखिल किया। इसके बाद आकाश फुंडकर के समर्थक राम मिश्रा ने सभी 12 संचालकों को एकजुट रखने की जिम्मेदारी संभाली और उन्हें कुछ दिनों के लिए शहर से बाहर अज्ञात स्थल पर ले जाया गया। इस दौरान प्रसाद एदलाबादकर और उमेश ढोण ने भी सहयोग किया।
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा
14 नवंबर को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा एवं मतदान के लिए कृषि उपज मंडी के टीएमसी यार्ड स्थित स्व. विलासराव देशमुख सभागृह में बैठक आयोजित की गई। पुलिस सुरक्षा में अज्ञात स्थल से लौटे संचालक बैठक में उपस्थित हुए। पिठासीन अधिकारी एसडीओ डॉ. रामेश्वर पुरी ने सुबह 11 बजे बैठक शुरू की। सभा में सभापति सहित 13 संचालक मौजूद थे, जबकि 5 अनुपस्थित रहे। मतदान के दौरान स्वयं सभापति पेसोडे ने प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया, जबकि 12 संचालकों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।
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पुलिस का कड़ा बंदोबस्त
उपस्थित संचालकों में राजाराम अर्जुन कालणे, विनोद टिकार, गणेश माने, श्रीकृष्ण टिकार, शांताराम पाटेखेडे, अशोक हटकर, मंगेश इंगले, सचिन वानखड़े, वैशाली मुजुमले, संघपाल जाधव, राजेश हेलोडे और सुलोचना वानखड़े शामिल थे। अनुपस्थित संचालकों में विलास इंगले, प्रमोदकुमार चिंचोलकर, किंमत कोकरे, गणेश ताठे और संजय झुनझुनवाला का समावेश रहा। अविश्वास प्रस्ताव पारित होते ही यार्ड के बाहर विधायक आकाश फुंडकर, ज्ञानेश्वर पाटिल और वंचित बहुजन आघाड़ी के समर्थकों ने जश्न मनाया। मौके पर पुलिस का कड़ा बंदोबस्त रहा।
अपहरण प्रकरण ने लिया नाटकीय यू-टर्न
इसी राजनीतिक हलचल के बीच 13 नवंबर की रात संचालिका वैशाली दिलीप मुजुमले के पति ने पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई कि ज्ञानेश्वर पाटिल और स्वप्निल ठाकरे पाटिल ने उनकी पत्नी का अपहरण कर लिया है। इससे शहर की राजनीति में भूचाल आ गया।
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हालांकि, अगले ही दिन 14 नवंबर को स्वयं वैशाली मुजुमले जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँचीं और पति द्वारा लगाए गए आरोपों को झूठा करार दिया। उन्होंने अपने ज्ञापन में स्पष्ट लिखा “मेरे पति की ओर से दी गई अपहरण की शिकायत झूठी है। वीडियो में मेरा दिया हुआ वक्तव्य भी दबाव में दिलाया गया था। मैं अविश्वास प्रस्ताव के मतदान के लिए स्वयं अपनी इच्छा से जा रही हूँ। मुझ पर किसी का दबाव नहीं है।” इस खुलासे के बाद शहर का राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया तथा पूरे दिन भर इस मामले की चर्चा होती रही।
