असंगठित मज़दूरों की योजनाएं बंद करने के विरोध में धरना आंदोलन, 15 संगठन संयुक्त रूप से हुए शामिल

Akola Dharna: धरना दे रहे संगठनों का आरोप है कि कल्याणकारी मंडल का आरक्षित निधि ‘लाडली बहन’ योजना में स्थानांतरित कर दिया गया है, जिससे असंगठित मज़दूरों को मिलने वाली योजनाएं बंद हो रही हैं।
विधानसभा में उठाया जाएगा मज़दूरों का मुद्दा
विधानसभा में उठाया जाएगा मज़दूरों का मुद्दा (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Akola News: महाराष्ट्र राज्य इमारत व अन्य निर्माण कार्य कल्याणकारी मंडल द्वारा असंगठित मज़दूरों के लिए चलाई जा रही 32 योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से बंद किए जाने के विरोध में असंगठित मज़दूर संगठन संयुक्त कृति समिति, अकोला ने मंगलवार को जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष धरना आंदोलन किया। इस आंदोलन का नेतृत्व समिति के जिलाध्यक्ष शैलेश सूर्यवंशी ने किया।

इस अवसर पर जिलाधिकारी को एक औपचारिक निवेदन भी सौंपा गया। इस आंदोलन के दौरान कांग्रेसी नेता विधायक साजिद खान पठान ने उपस्थित होकर आश्वासन दिया कि आगामी विधानसभा अधिवेशन में कांग्रेस के 16 विधायक यह प्रश्न उठाएंगे कि मज़दूरों की योजनाएं क्यों बंद की गईं। उन्होंने कहा कि मज़दूरों को न्याय दिलाने के लिए विधिमंडल स्तर पर ठोस प्रयास किए जाएंगे।

धरना आंदोलन को समर्थन

संयुक्त कृति समिति के बैनर तले बिल्डिंग कामगार एसोसिएशन, बिल्डिंग पेंटर्स, कल्याणकारी मज़दूर एसोसिएशन, एकता असंगठित निर्माण कार्य मज़दूर एसोसिएशन, श्रमिक गर्जना फाउंडेशन, क्रांतिकारी मज़दूर एसोसिएशन सहित कुल 15 संगठनों ने आंदोलन में भाग लिया। इस आंदोलन को शिंदे गुट शिवसेना युवा आघाड़ी के एडके और इंटक के प्रदीप वखारिया सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने समर्थन दिया।

संगठनों का आरोप

संगठनों का आरोप है कि कल्याणकारी मंडल का आरक्षित निधि ‘लाडली बहन’ योजना में स्थानांतरित कर दिया गया है, जिससे असंगठित मज़दूरों को मिलने वाली योजनाएं बंद हो रही हैं। समिति ने मांग की है कि शैक्षणिक और विकासात्मक योजनाएं पुनः शुरू की जाएं और मज़दूरों के अधिकारों की रक्षा की जाए।

अनेकों की उपस्थिति

इस आंदोलन में प्रमुख रूप से शैलेश सूर्यवंशी, बाबुलाल डोंगरे, संदीप खंडारे, प्रवीण खंडारे, सुनील वानखडे, प्रेम वानखडे, पंचशील गजघाटे, अनुराधा ढिसाले, अक्षय सूर्यवंशी, दिनेश डोंगरदिवे, नदिम शाह, कुंदन पवार, जाकिर शहा, सचिन पडोले, माया नेमाडे, उज्वला तायडे, सिध्दार्थ पाटिल, भास्कर सोनोने, शेख एजाज, संदेश गोपनारायण, केदार ठाकरे, संदीप नरवने, अनिल येलकर, अजय उपर्वट, गोपाल उपर्वट, स्वप्निल उपर्वट, सचिन तायडे, विजय ढोले, शेख इर्शाद, रामेश्वर नाटकर, शिलवंत वानखडे, प्रकाश तेलगोटे, एजाज खान, किरण कावडे, सुखदेव मावले, राहुल सिरसाट, अजिंक्य सूर्यवंशी, विशाल घायवट, प्रवीण उडतकर, सागर नितनवरे, भीमराव वानखडे सहित बड़ी संख्या में महिला और पुरुष मज़दूर शामिल हुए। इस आंदोलन के माध्यम से मज़दूरों ने सरकार से अपील की है कि उनके कल्याण के लिए बनाई गई योजनाओं को बंद न किया जाए और उन्हें पुनः सक्रिय किया जाए।

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