'हम भी कोई सोने का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुए', अजित पवार का चंद्रकांत पाटिल पर तंज

Maharashtra News: अजित पवार ने चंद्रकांत पाटिल पर तंज कसते हुए कहा कि हम कोई सोने का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुए। महायुति के दिग्गज नेताओं के बीच इस तरह की बयानबाजी से राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
अजित पवार, चंद्रकांत पाटिल (pic credit; social media)
अजित पवार, चंद्रकांत पाटिल (pic credit; social media)
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Maharashtra Politics: बॉलीवुड की तरह राजनीति में भी नेपोटिज्म अर्थात परिवारवाद हमेशा से चर्चा का विषय बनता रहा है। अपने दम पर राजनीति में जगह बनानेवाले लोग राजनीतिक पृष्ठभूमि वालों पर मुंह में सोने का चम्मच लेकर जन्म लेने का तंज कसते हैं। सोने के चम्मच पर ऐसा ही चुटीला वाकयुद्ध महायुति सरकार के दो दादा (मंत्री चंद्रकांत पाटिल और उप मुख्यमंत्री अजीत पवार) के बीच देखने को मिला।

एक कार्यक्रम में शरद पवार की राकां के विधायक रोहित पवार की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए मंत्री पाटिल ने कहा कि हम सोने का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुए हैं। इसके जवाब में अजीत ने रोहित का बचाव करते हुए बताया कि वह भी कड़े संघर्षों के बाद इस मुकाम पर पहुंचे हैं।

महायुति में सोने का चम्मच बना तकरार का मुद्दा

सांगली के इस्लामपुर में महात्मा फुले शिक्षण संस्थान के प्रो. डॉ. एन.डी. पाटिल विधि महाविद्यालय एवं अन्य उपक्रमों के उद्घाटन समारोह रोहित पवार ने कहा कि मैं प्रो. डॉ. एन.डी. पाटिल महाविद्यालय को 40 लाख रुपए दे रहा हूं। इस मौके पर कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अजित पवार, भाजपा नेता व मंत्री चंद्रकांत पाटिल, राकां शरदचंद्र पवार के नेता जयंत पाटिल भी मौजूद थे।

रोहित ने आगे कहा कि चंद्रकांत पाटिल 40 लाख में एक शून्य और जोड़ देंगे। इसके बाद जयंत पाटिल भी एक शून्य जोड़ेंगे तथा अंत में अजीत पवार के पास वित्त विभाग है, इसलिए वे दो और शून्य जोड़ देंगे। इस पर चंद्रकांत पाटिल ने रोहित पर पलटवार करते हुए कहा कि मैं सोने का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुआ हूं।

जीवन के कड़े संघर्षों का किया खुलासा

चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि मैं वर्षों तक मुंबई में रहा। मैंने 13 वर्षों तक संगठन के लिए काम किया। मैंने पूरे राज्य का भ्रमण किया। उसके बाद मैं कोल्हापुर में आकर बस गया। मैं एक मिल मजदूर का बेटा हूं। मेरे माता-पिता दोनों मिल मजदूर थे। मैं आपकी तरह सोने का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुआ। मेरे पिता का पहला वेतन 10 रुपए प्रति माह था। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें 1400 रुपए प्रति माह मिलते थे। इसलिए, मैं ऐसी कोई घोषणा नहीं कर सकता हूं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जरूरत पड़ी तो हम अपना घर बेचकर सामाजिक कार्य करने की आदत हो गई है। लेकिन यहां यह नौबत नहीं आएगी। सरकारी धन और प्रशासनिक अधिकार हमारे हाथ में हैं। दादा ने निर्देश दिया है। मेरा आधा हिस्सा है। मैं इसकी घोषणा करूंगा।

अजित  पवार ने किया रोहित का बचाव

चंद्रकांत पाटिल के कटाक्ष के बाद अजित पवार ने पवार परिवार के सदस्य होने की वजह से रोहित का बचाव किया। चंद्रकांत को लक्ष्य करते हुए अजित ने कहा कि आप एक मिल मजदूर के बेटे हैं तो हम भी कोई मुंह में सोने का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुए थे। हमने भी बहुत मुश्किल हालातों में दिन गुजारे हैं।

प्रशांत और हमारे पास ऊपर की मंजिल पर जाने के लिए सीढ़ियां नहीं थीं। एक खंडहर के रास्ते हम ऊपर चढ़ते थे। भले ही बाद में रोहित पैदा होने तक हालात बदल गए थे। यह अलग बात है। मैं उस गहराई में नहीं जाऊंगा. लेकिन हमने भी संघर्ष के दिन देखे हैं.

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