
Shiv Sena internal conflict (सोर्सः सोशल मीडिया)
Ahilyanagar Politics: शिवसेना में मंज़ूर (नामित) सदस्य बनाने को लेकर जबरदस्त खींचतान चल रही है और इसी वजह से बड़े नेताओं तक लॉबिंग शुरू हो गई है। पार्टी में मालीवाड़ा के बढ़ते प्रभाव से स्थानीय पदाधिकारी और नगरसेवक बेचैन नजर आ रहे हैं। मंज़ूर सदस्यों के चुनाव के बाद शिवसेना में असंतोष बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। मनपा चुनाव में शिवसेना के 10 नगरसेवक चुने गए हैं। हालांकि, स्थानीय स्तर पर मजबूत नेतृत्व की कमी के कारण कई वरिष्ठ नगरसेवकों ने अपने-अपने फैसले लेने शुरू कर दिए हैं।
पहली चिंगारी ग्रुप लीडर की नियुक्ति को लेकर भड़की। वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के कारण ग्रुप रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए। यह विवाद अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। अब मनपा में विपक्ष के नेता के रूप में बालासाहेब बोराटे के नाम की सिफारिश की गई है। नगरसेवकों का मानना है कि इस निर्णय में सभी को भरोसे में नहीं लिया गया। मंगलवार को आधिकारिक तौर पर घोषणा की गई कि संभाजी कदम को शहर प्रमुख बनाया गया है। इस नियुक्ति को लेकर भी पार्टी के भीतर नाराजगी देखी जा रही है।
नगर निगम में पार्टी की ताकत के आधार पर कुल छह नामित सदस्य बनाए जाने हैं, जिनमें नेशनलिस्ट पार्टी के तीन, BJP के दो और शिवसेना का एक सदस्य शामिल होगा। शिवसेना में इस एक सीट के लिए कई दावेदार सामने आ गए हैं। कहा जा रहा है कि यदि संभाजी कदम को शहर प्रमुख का पद दिया जाता है, तो वे इस दौड़ से बाहर हो जाएंगे।
इस पद के लिए जिला प्रमुख अनिल शिंदे, मौजूदा शहर प्रमुख सचिन जाधव और एक अन्य नेता दिलीप सतपुते इच्छुक बताए जा रहे हैं। इसके अलावा, नगर निगम चुनाव के दौरान पार्टी में शामिल हुए विक्रम राठौड़ भी इस पद के लिए प्रयास कर रहे हैं। ये सभी नेता वरिष्ठ पदाधिकारियों से संपर्क कर अपनी दावेदारी मजबूत करने में लगे हैं।
मालीवाड़ा इलाके के वार्ड 12 में ग्रुप लीडर और शहर प्रमुख जैसे अहम पद दिए गए हैं। इसी वार्ड के एक पार्षद को विपक्ष का नेता बनाने की भी सिफारिश की गई है। इससे कई पार्षद और स्थानीय पदाधिकारी नाराज बताए जा रहे हैं। हालांकि, नामित सदस्य के पद के लिए ग्रुप लीडर के सिफारिशी पत्र की जरूरत होती है। ऐसे में खुलकर नाराजगी जाहिर करना कई लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है। बावजूद इसके, अंदरखाने इस मुद्दे पर लगातार चर्चा चल रही है।
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शहर के निवर्तमान प्रमुख सचिन जाधव के नाम का भी कड़ा विरोध हो रहा है। नगर निगम चुनाव में उनकी भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि पार्टी से मिले एबी फॉर्म के वितरण को लेकर भी असंतोष है और इस मुद्दे को लेकर नाराजगी बढ़ी है। दिलचस्प बात यह है कि मालीवाड़ा इलाके से ही जाधव के विरोध को और तेज करने की कोशिशों की चर्चा हो रही है।
पार्टी में 10 कॉर्पोरेटर हैं। नामित सदस्य बनने की चाह रखने वाले कुछ लोगों ने कॉर्पोरेटरों को ‘संतुष्ट’ करने की तैयारी भी दिखाई है। यह आर्थिक पहलू अब पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बन गया है।






