
पानी की टंकी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Madhya Pradesh News: आज इंदौर के लोग नर्मदा पाइपलाइन का पानी पीने से डर रहे हैं। भागीरथपुरा की घटना ने प्रशासनिक लापरवाही और सुस्त रवैये को उजागर किया है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब इंदौर को ऐसी समस्या का सामना करना पड़ा है। 30 साल पहले भी कुछ ऐसा ही हुआ था, जब लोग पाइपलाइन का पानी पीने से डरते थे।
आज भी उस इलाके के पुराने लोग उस घटना को याद करके सिहर उठते हैं। यह 1995 की बात है, जब राजवाड़ा के पास सुभाष चौक पर पानी की टंकी में एक सड़ी-गली लाश मिली थी। दूषित पानी पीने से कई लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे और उसके बाद महीनों तक लोग नल का पानी पीने से डरते रहे।
टंकी के पास दुकान चलाने वाले नरेश नेहलानी आज भी उस घटना को याद करके सिहर उठते हैं। उन्होंने बताया कि एक शराबी आदमी टंकी पर चढ़ गया था और उसमें गिरकर उसकी मौत हो गई थी। क्योंकि टंकी की नियमित रूप से जांच नहीं होती थी, इसलिए किसी को भी उस आदमी की मौत के बारे में पता नहीं चला।
जब पानी से बदबू आने लगी और लोगों ने शिकायत की, तो जांच शुरू की गई और टंकी में लाश मिली। लाश पूरी तरह से सड़ चुकी थी। जब सच्चाई सामने आई तो लोग यह सोचकर डर गए कि वे इतने लंबे समय से वही पानी पी रहे थे। पानी से बहुत बदबू आ रही थी और उसे पीने से कई लोग बीमार पड़ गए थे।
दरअसल, उस दौरान सुभाष चौक और आसपास के रिहायशी इलाकों जैसे इमली बाजार, राजवाड़ा और खजूरी बाजार में पेट दर्द, उल्टी और दस्त के मामले तेजी से बढ़ रहे थे। शुरुआत में लोगों को लगा कि यह मौसम बदलने की वजह से है, लेकिन हैरानी की बात यह थी कि बीमारी एक खास इलाके तक ही सीमित थी।
स्थानीय लोगों ने नगर निगम से शिकायत की कि नल के पानी से अजीब, बदबू आ रही है और उसका रंग भी बदला हुआ है। शुरुआत में प्रशासन ने इसे पाइपलाइन लीक बताकर टाल दिया। बाद में जब शिकायतें बहुत ज्यादा बढ़ गईं तो नगर निगम के कर्मचारी जांच के लिए सुभाष चौक की टंकी पर चढ़े।
जैसे ही उन्होंने टंकी का ढक्कन हटाया जो देखा उससे वे चौंक गए। पानी की सतह पर एक इंसान की लाश तैर रही थी जो कई दिनों से वहां होने की वजह से बुरी तरह सड़ चुकी थी। सब लोग हैरान थे। लोगों को विश्वास नहीं हो रहा था कि जिस पानी को वे पी रहे थे और खाना बनाने में इस्तेमाल कर रहे थे, जिस पानी से इतनी बदबू आ रही थी, उसमें एक इंसान की लाश थी।
लोग सड़कों पर उतर आए और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उस समय इंदौर नगर निगम पर कांग्रेस पार्टी का राज था और मधुकर वर्मा मेयर थे। इस घटना से इंदौर में बड़े पैमाने पर गुस्सा फैल गया। लोगों ने नगर निगम की बिल्डिंग को घेर लिया। कई दिनों तक इलाके के लोगों ने नल का पानी इस्तेमाल करना बंद कर दिया। वे कुओं और दूर की जगहों से आने वाले पानी के टैंकरों पर निर्भर थे।
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उस समय डॉक्टरों के अनुसार, सैकड़ों लोग गैस्ट्रोएंटेराइटिस और दूसरे गंभीर इन्फेक्शन से बीमार हो गए थे। मनोवैज्ञानिक रूप से लोग इतने सदमे में थे कि पानी की टंकी साफ होने के महीनों बाद भी उन्हें लगता था कि पानी में बदबू आ रही है और उन्होंने उसे पीने से मना कर दिया।
Ans: इंदौर में अब से 30 साल पहले साल 1995 में पानी की टंकी में एक सड़ी हुई लाश पाई गई थी। जिसकी वजह से लोग दूषित पानी पीकर बीमार हो रहे थे।
Ans: उस समय डॉक्टरों के अनुसार, सैकड़ों लोग गैस्ट्रोएंटेराइटिस और दूसरे गंभीर इन्फेक्शन से बीमार हो गए थे।
Ans: एक शराबी आदमी टंकी पर चढ़ गया था और उसमें गिरकर उसकी मौत हो गई थी। क्योंकि टंकी की नियमित रूप से जांच नहीं होती थी, इसलिए किसी को भी उस आदमी की मौत के बारे में पता नहीं चला।






