MP महिला आयोग की जनसुनवाई, सामने आया AI और साइबर अपराधों का खौपनाक चेहरा; ब्लैकमेल करने वाले का कूट भंडाफोड़
Public Hearing Of Women Commission: एमपी महिला आयोग की जनसुनवाई में AI डीपफेक ब्लैकमेलिंग का बड़ा खुलासा, अध्यक्ष रेखा यादव ने साइबर सेल को सौंपी जांच, शादी का झांसा देने वालों पर FIR के निर्देश।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: सजल रघुवंशी
महिला आयोग की जनसुनवाई (सोर्स- सोशल मीडिया)
MP Women Commission Jansunwai: मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग की सोमवार को आयोजित संयुक्त बेंच (जनसुनवाई) में सामने आए मामलों ने राज्य की सुरक्षा एजेंसियों को सकते में डाल दिया है। आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव और सदस्य साधना स्थापक की अगुवाई में हुई इस सुनवाई में 22 गंभीर प्रकरणों की त्वरित सुनवाई की गई।
जहां एक ओर घरेलू हिंसा के मामले चिंता का विषय बने रहे, वहीं दूसरी ओर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए महिलाओं को ब्लैकमेल करने और यौन शोषण के आधुनिक अपराधों ने आयोग का ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया।
रिश्ता टूटने का लिया खौफनाक बदला
जनसुनवाई का सबसे चौंकाने वाला मामला एक युवती द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत थी। पीड़िता ने बताया कि एक वैवाहिक वेबसाइट के माध्यम से उसका रिश्ता तय हुआ था। परिवार द्वारा रिश्ता अस्वीकार किए जाने पर, आरोपी युवक ने प्रतिशोध की आग में पीड़िता की प्रतिष्ठा धूमिल करने का प्रयास किया। उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग कर युवती की फर्जी सगाई, गोदभराई और अन्य भ्रामक तस्वीरें तैयार कर सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दीं। आयोग ने इसे गंभीर साइबर अपराध मानते हुए मामले को तत्काल जांच के लिए साइबर वेलनेस सेंटर (साइबर सेल) को सौंप दिया है।
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शादी का झांसा और आर्थिक शोषण
एक अन्य पीड़िता ने शिकायत की कि एक युवक ने विवाह का झूठा आश्वासन देकर उसका शारीरिक शोषण किया और उसे प्रताड़ित किया। इस साजिश में आरोपी की मां भी शामिल थी, जिसने शादी का भरोसा देकर पीड़िता से मोटी रकम ऐंठी और बाद में शादी से इनकार कर दिया। महिला आयोग ने इस मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए संबंधित थाना प्रभारी को आरोपी और उसकी मां के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
रसूख का धौंस पत्रकार बताकर नर्स को ब्लैकमेल
सुनवाई में एक अस्पताल की नर्स ने खुद को पत्रकार बताने वाले एक व्यक्ति के खिलाफ मानसिक उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई। आरोपी न केवल महिला के खिलाफ सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो और खबरें फैला रहा था, बल्कि उसने महिला आयोग के वैधानिक अस्तित्व पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की। आयोग ने सख्त रवैया अपनाते हुए दोनों पक्षों को तलब किया और मामले में कानूनी कार्रवाई का रोडमैप तैयार किया।
‘ट्रॉमा-इन्फॉर्म्ड’ काउंसलिंग
जनसुनवाई के दौरान आयोग परिसर में ‘स्काई सोशल एनजीओ’ द्वारा एक विशेष शिविर लगाया गया। यहाँ प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिकों ने हिंसा और उत्पीड़न से जूझ रही महिलाओं को ‘ट्रॉमा-इन्फॉर्म्ड’ सहायता प्रदान की। इस पहल का उद्देश्य मानसिक तनाव से घिरी महिलाओं को सशक्त बनाना था, ताकि वे कानूनी लड़ाई लड़ने के साथ-साथ मानसिक रूप से भी स्वस्थ रह सकें।
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आयोग का संदेश
महिला आयोग ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं के विरुद्ध किसी भी प्रकार की डिजिटल या पारंपरिक हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी सभी मामलों में निष्पक्ष एवं त्वरित वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
