नारी शक्ति वंदन पर महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर का बड़ा बयान, कहा- निर्णय लेने वाले पदों पर बढ़े भागीदारी

NCW Chairperson Vijaya Rahatkar Statement: राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को ऐतिहासिक बताया।राजनीति और नीति निर्माण में महिलाओं उपस्थिति को जरूरी बताया।
NCW Chairperson Vijaya Rahatkar On Nari Shakti Vandan Act
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Vijaya Rahatkar On Nari Shakti Vandan Act: राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा है कि अब समय आ गया है जब देश की नारी शक्ति को निर्णय लेने वाले मंचों पर अधिक अवसर दिए जाएं। महिलाओं की बढ़ती शिक्षा, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक भागीदारी को देखते हुए राजनीति और नीति निर्माण की प्रक्रिया में उनकी मजबूत उपस्थिति बेहद जरूरी है।

नवभारत के साथ खास बातचीत में विजया रहाटकर ने कहा कि आज जब किसी बच्ची से पूछा जाता है कि वह बड़ी होकर क्या बनना चाहती है, तो वह डॉक्टर, इंजीनियर या आईएएस बनने जैसे बड़े सपने बताती है। यह इस बात का संकेत है कि समाज में बेटियां अब बड़े लक्ष्य तय कर रही हैं और उन्हें हासिल करने के लिए आगे भी बढ़ रही हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि शासन और निर्णय प्रक्रिया में भी उनकी भागीदारी बढ़ाई जाए।

लोकतंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

विजया रहाटकर ने कहा कि वर्ष 1992 में हुए 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के माध्यम से पंचायत राज संस्थाओं और नगर निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया था। इस पहल ने लोकतंत्र को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से विकास की प्राथमिकताओं में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला। उन्होंने बताया कि महिलाओं के नेतृत्व में जल प्रबंधन, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं, आंगनवाड़ी, स्कूलों और पोषण जैसे विषयों को अधिक महत्व मिला। इसके साथ ही बाल विवाह, घरेलू हिंसा और नशे जैसी सामाजिक समस्याओं के खिलाफ भी मजबूत पहल हुई।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम ऐतिहासिक कदम

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2023 में संसद द्वारा पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

विजया रहाटकर ने कहा कि जब संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी, तो नीतियां अधिक संतुलित और समाज की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनेंगी। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को भी अधिक प्राथमिकता मिलने की संभावना है।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ने से लोकतंत्र अधिक मजबूत और समावेशी बनेगा। यह केवल महिलाओं को अवसर देने का विषय नहीं है, बल्कि देश के भविष्य और विकास की दिशा तय करने से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि जब नारी शक्ति निर्णय मंचों पर पहुंचेगी, तो देश की प्रगति को नई गति मिलेगी।

- नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट

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