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उत्तराखंड की तर्ज पर तैयार होगा MP का UCC ड्राफ्ट; जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की समिति ने पूरे किए प्रावधान

UCC Draft In Last Stage MP: मध्य प्रदेश में यूसीसी (UCC) की तैयारी अंतिम चरण में, मानसून सत्र में आ सकता है बिल, लिव-इन का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और बेटियों को संपत्ति में बराबर हक।

  • Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: सजल रघुवंशी
Updated On: Jun 18, 2026 | 02:51 PM

मध्य प्रदेश यूसीसी (सोर्स- सोशल मीडिया)

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Madhya Pradesh UCC Draft 2026: उत्तराखंड के बाद अब मध्य प्रदेश में भी समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की कवायद बेहद तेज हो गई है। राज्य में इस कानून का ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद संकेत दिए हैं कि सरकार आगामी मानसून सत्र में इस ऐतिहासिक विधेयक को विधानसभा में पेश कर पारित करा सकती है।

इस बड़े और प्रगतिशील सामाजिक सुधार के लिए व्यापक जनसमर्थन (पब्लिक मैंडेट) जुटाने के उद्देश्य से समिति के सदस्य लगातार अलग-अलग जिलों में जाकर विभिन्न समूहों से संवाद कर रहे हैं। साथ ही आम जनता से ऑनलाइन 12 सवाल पूछकर ‘हां’ या ‘ना’ में राय भी मांगी जा रही है।

कानून के 4 मजबूत सामाजिक स्तंभ

मध्य प्रदेश का आगामी यूसीसी कानून मुख्य रूप से चार मजबूत सामाजिक स्तंभों पर टिका होगा, जिसका उद्देश्य अलग-अलग पर्सनल लॉ के कारण पैदा होने वाली कानूनी जटिलताओं को हमेशा के लिए खत्म करना है:

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  • विवाह (Marriage)
  • तलाक और भरण-पोषण (Divorce & Maintenance)
  • उत्तराधिकार व संपत्ति (Inheritance & Property)
  • आधुनिक लिव-इन संबंध (Live-in Relationships)

लिव-इन रिलेशनशिप पर रहेगा सख्त पहरा

यूसीसी के ड्राफ्ट में ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ को लेकर बेहद सख्त और सुरक्षात्मक प्रावधान रखे गए हैं। सरकार लिव-इन संबंधों को केवल एक ‘निजी पसंद’ नहीं रहने देना चाहती। इसके तहत निम्नलिखित नियम लागू होंगे:

  • अनिवार्य रजिस्ट्रेशन
  • उत्तराखंड की तरह मध्य प्रदेश में भी लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को अनिवार्य रजिस्ट्रेशन या डिक्लेरेशन करना होगा।
  • महिलाओं को भरण-पोषण
  • लिव-इन संबंध से अलग होने की स्थिति में पीड़ित महिला को वित्तीय सहायता (भरण-पोषण) पाने का कानूनी अधिकार होगा।
  • बच्चों को पूर्ण अधिकार

इन संबंधों से पैदा होने वाले बच्चों को समाज में ‘नाजायज’ न माना जाए, इसके लिए उन्हें पूर्ण कानूनी संरक्षण दिया जाएगा। ऐसे बच्चों को माता-पिता की संपत्ति में पूर्ण बायोलॉजिकल उत्तराधिकार और भरण-पोषण का हकदार बनाया गया है।

जेंडर और रिलीजन न्यूट्रल व्यवस्था

राज्य सरकार पूरी तरह से लैंगिक समानता और धर्मनिरपेक्षता पर आधारित व्यवस्था लाना चाहती है। समान पारिवारिक कानून के तहत सभी समुदायों में पुरुषों और महिलाओं के लिए एक जैसे पारिवारिक नियम लागू होंगे। बता दें कि संपत्ति में बराबरी के अलावा संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में महिलाओं को पुरुषों के बिल्कुल बराबर अधिकार दिए जाएंगे।

तलाक का अनिवार्य पंजीकरण

एकतरफा या भेदभावपूर्ण तलाक कानूनों को पूरी तरह समाप्त किया जा रहा है। अब किसी भी प्रकार के विवाह विच्छेद (तलाक) को तभी वैध माना जाएगा, जब उसका सरकारी पोर्टल या कोर्ट में अनिवार्य पंजीकरण कराया जाएगा। इसके अलावा, तलाक के बाद महिला और बच्चों के गुज़ारे भत्ते (एलिमनी) के नियम सभी धर्मों के लिए एक समान होंगे।

यह भी पढ़ें: मंत्रियों को ‘नाकारा’ बताने वाले BJP विधायक पन्नालाल शाक्य के सुर बदले, प्रदेश अध्यक्ष से मिलकर दी सफाई

पर्सनल लॉ का विलीनीकरण और संवैधानिक संतुलन

इस नए कानून के प्रभावी होते ही सभी धर्मों के व्यक्तिगत कानून (जैसे हिंदू कोड बिल या मुस्लिम पर्सनल लॉ) के प्रभाव पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे। विवाह, गोद लेने और संपत्ति के अधिकार में सबके लिए एक समान नियम काम करेंगे। इस यूसीसी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि किसी की धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25-28) को ठेस पहुंचाए बिना, नागरिकों के समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14-15) और नीति निर्देशक तत्व (अनुच्छेद 44) के बीच एक मजबूत संवैधानिक संतुलन स्थापित किया जा सके।

Madhya pradesh ucc draft in last stage present vidhansabha in monsoon session

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Published On: Jun 18, 2026 | 02:51 PM

Topics:  

  • Bhopal News
  • Madhya Pradesh
  • MP News

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