जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखा पत्र, आदिवासियों की समस्याओं की ओर ध्यान देने की मांग
MP Congress News: PCC चीफ जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा है। पटवारी ने आदिवासियों की समस्याओं की ओर प्रेसिडेंट का ध्यान आकर्षित करते हुए कुछ मांगें की हैं। सरकार को भी घेरा है।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: प्रीतेश जैन
जीतू पटवारी (फोटो सोर्स- नवभारत)
Jitu Patwari President Letter: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के मध्य प्रदेश दौरे के बीच राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर आदिवासी समाज की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का आदिवासी समाज ‘दया नहीं, अधिकार चाहता है, आश्वासन नहीं, अवसर चाहता है।’
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 18 से 22 जून तक मध्य प्रदेश के पांच दिवसीय प्रवास पर हैं। इस दौरान वे इंदौर, बैतूल, ओंकारेश्वर, जबलपुर, ग्वालियर और श्योपुर में विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगी। वे ओंकारेश्वर में ज्योतिर्लिंग दर्शन और विशेष आरती में भी भाग लेंगी।
आदिवासियों को सिर्फ घोषणाओं की नहीं…
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने अपने पत्र में राष्ट्रपति मुर्मु को देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बताते हुए उनके संघर्षों को याद किया। उन्होंने कहा कि इसी कारण देश के 1.53 करोड़ आदिवासी नागरिकों को उनसे विशेष अपेक्षाएं हैं। पटवारी ने कहा कि आज आदिवासी समाज को केवल योजनाओं और घोषणाओं की नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के वास्तविक क्रियान्वयन की आवश्यकता है।
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आदिवासी समाज की प्रमुख समस्याएं
पत्र में कांग्रेस ने आदिवासी समाज से जुड़ी कई गंभीर समस्याएं उठाईं
- शिक्षा संकट: अनुसूचित जनजातियों में साक्षरता दर औसत से काफी कम है। कई स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं और छात्रावासों की स्थिति खराब है।
- स्वास्थ्य सेवाएं: आदिवासी क्षेत्रों में डॉक्टरों की भारी कमी है। कुपोषण, एनीमिया और टीबी जैसी बीमारियां गंभीर चुनौती बनी हुई हैं।
- बेरोजगारी और पलायन: परंपरागत आजीविका कमजोर होने से बड़ी संख्या में युवा पलायन करने को मजबूर हैं।
- गरीबी और महंगाई: बढ़ती लागत और सीमित संसाधनों ने आदिवासी परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ाया है।
- जल, जंगल और जमीन का मुद्दा: वनाधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और पुनर्वास की कमी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
कांग्रेस की 10 सूत्रीय मांगें
- शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए विशेष आपात योजना
- रिक्त पदों पर समयबद्ध भर्ती
- वनाधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन
- रोजगार एवं कौशल विकास मिशन
- कुपोषण और टीबी पर विशेष अभियान
- आदिवासी महिलाओं के लिए सुरक्षा और सशक्तिकरण योजना
- TSP बजट का पारदर्शी उपयोग
- बुनियादी ढांचे का विस्तार (सड़क, पानी, इंटरनेट, शिक्षा)
- PESA कानून का प्रभावी क्रियान्वयन
- आदिवासी विकास पर उच्चस्तरीय आयोग का गठन
- सियासी तापमान बढ़ा
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राजनीतिक हलचल तेज
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के बीच कांग्रेस के इस पत्र को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जहां कांग्रेस इसे आदिवासी अधिकारों की आवाज बता रही है, वहीं सत्तापक्ष इसे राजनीतिक बयानबाजी के तौर पर देख रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बहस और तेज होने की संभावना है।
