राजधानी से 3 साल में 1968 बच्चियां लापता, उमंग सिघार का सरकार पर हमला- बेटी बचाओ सिर्फ विज्ञापनों तक सीमित
Umang Singhar Statement: भोपाल में 3 साल में 1968 नाबालिग लड़कियों के लापता होने पर उमंग सिंघार ने सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राजधानी में हर दिन दो बेटियां गायब हो रही हैं।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: प्रीतेश जैन
उमंग सिंघार (फोटो सोर्स- नवभारत)
Bhopal Missing Girls Case: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में नाबालिग लड़कियों के लगातार लापता होने का मामला अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक संकट में बदल गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उमंग सिंघार ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सिंघार ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि प्रदेश की राजधानी अब हमारी बेटियों के लिए सुरक्षित नहीं रह गई है।
कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने आंकड़ों के जरिए सरकार को घेरते हुए कहा कि भोपाल में नाबालिग बालिकाओं के गायब होने की रफ्तार बेहद डरावनी है। राजधानी में हर दिन औसतन दो नाबालिग बेटियां लापता हो रही हैं।
पिछले कुछ सालों की स्थिति पर नजर
पिछले तीन वर्षों में राजधानी से कुल 1,968 नाबालिग बालिकाएं लापता दर्ज की गई हैं, जो सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मौजूदा वर्ष में भी हालात में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला है। वर्ष 2026 में 16 जून तक ही 316 नाबालिग लड़कियों के गुमशुदा होने के मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
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मानव तस्करी और शोषण की आशंका
उमंग सिंघार ने इस पूरे मामले को एक सामान्य अपराध मानने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने इसे एक गहरा सामाजिक संकट बताते हुए अंदेशा जताया कि इन घटनाओं के पीछे मानव तस्करी , जबरन श्रम और गंभीर शोषण करने वाले संगठित गिरोहों का हाथ हो सकता है। सिंघार ने कहा कि इन मामलों को केवल गुमशुदगी या सामान्य अपहरण की धाराओं में दर्ज करके ठंडे बस्ते में नहीं डाला जा सकता, क्योंकि यह प्रदेश के युवाओं और बेटियों के भविष्य से जुड़ा संवेदनशील मामला है।
राजधानी का ये हाल है तो…
नेता प्रतिपक्ष ने कहा जब प्रदेश की कानून-व्यवस्था की नाक के नीचे, खुद राजधानी भोपाल में ही बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, तो मध्यप्रदेश के दूर-दराज के जिलों और गांवों के हालातों का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
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‘बेटी बचाओ’ का नारा सिर्फ प्रचार
मुख्यमंत्री मोहन यादव पर सीधा निशाना साधते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर मंचों से बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके बिल्कुल उलट और चिंताजनक बने हुए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा का प्रसिद्ध नारा “बेटी बचाओ” अब केवल चुनावी प्रचार और होर्डिंग्स तक सीमित होकर रह गया है।
