World Reef Day 2026: जलवायु परिवर्तन के खतरे से जूझ रही है कोरल रीफ, जानें क्यों खास है आज का दिन
World Reef Day: विश्व प्रवाल भित्ति जागरूकता दिवस हर साल 1 जून को मनाया जाता है। यह दिन समुद्री जीवन के बारे में जागरूकता बढ़ाने और उनकी रक्षा करने के तरीकों के बारे में जानकारी देने के लिए है।
- Written By: रीता राय सागर
वर्ल्ड रीफ डे( फोटो.सोशल मीडिया)
World Reef Awareness Day: 1 जून को मनाया जाने वाला ‘वर्ल्ड रीफ अवेयरनेस डे’ कंज्यूमर, बिजनेस और ऑर्गनाइजेशन के लिए एक ऐसी पहल है जो उन्हें समुद्र की कोरल रीफ यानी मूंगा की चट्टानों के इकोसिस्टम के संबंध में सोचने के लिए प्रेरणा देती है।
क्या होता है ‘Reef’
रीफ, समुद्र की सतह के ठीक नीचे मौजूद एक अद्भुत और खूबसूरत समुद्री इकोसिस्टम हैं। समुद्र में रहने वाले जीव को कई गोताखोरों ने खोजा है और यहाँ से मछलियों व अन्य समुद्री जीवों के अद्भुत नजारे देखने को मिलते हैं। बता दें कि जिन रंग-बिरंगे कोरल से ये रीफ बनी होती हैं, दरअसल वास्तव में वो पौधे नहीं, बल्कि वो पौधे जैसे दिखते हैं। असल में वो भी जीव होते हैं। विशेषत्ज्ञों के अनुसार, कोरल की कम से कम 25 अलग-अलग प्रजातियों को ‘संकटग्रस्त’ या ‘लुप्तप्राय’ श्रेणी में रखा गया है। ‘वर्ल्ड रीफ अवेयरनेस डे’ प्रकृति के इन खूबसूरत व महत्वपूर्ण हिस्सों की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करने का दिन है, ताकि शिक्षा और जागरूकता के जरिए एक सक्रिय बदलाव लाया जा सके।
क्या है विश्व रीफ जागरूकता दिवस का इतिहास
2019 में विश्व रीफ जागरूकता दिवस की शुरुआत (Raw Elements USA) के प्रचार की जरिए शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य रीफ की गंभीर स्थिति की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करना था। गौरतलब है कि Raw Elements कैलिफ़ोर्निया में स्थित एक कंपनी है, जो प्राकृतिक और सुरक्षित जिंक ऑक्साइड सनस्क्रीन बेचती है। आज के दिन की शुरूआत के बाद से पर्यावरण की बेहतरी के लिए काम करने वाली कई अन्य कंपनियां भी इसके साथ जुड़ती गई, इनमें रीफ अपैरल कंपनी भी शामिल है।
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अतीत से पता चलता है कि लगभग 440 मिलियन साल पहले समुद्र का तापमान बहुत तेजी से गिरा और समुद्र से बड़ी संख्या में कोरल खत्म होने लगे। इसे ऑर्डोविशियन-सिलुरियन विलुप्ति घटना कहा जाता है। लगभग 410 मिलियन साल पहले, डेवोनियन काल में, कोरल फिर से दिखाई देने लगे। इस काल के अंत में, पथरीले कोरल (stony corals) उगने लगे, जो उस समय रीफ का एक दुर्लभ रूप थे। इसके बाद भी कई बार कोरल गायब हुए और दोबारा से दिखे। इस घटना में 90% से ज्यादा समुद्री जीव प्रभावित हुए थे। समुद्र में ऑक्सीजन का स्तर कम होने और कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ने के कारण यह दुखद घटना होती रही है।
वर्ल्ड रीफ डे (फोटो. सोशल मीडिया)
रीफ के गायब होने के दुष्प्रभाव
हाल के दिनों में, कोरल ब्लीचिंग, समुद्र के बढ़ते तापमान और जहरीले प्रदूषण के कारण कुछ सबसे फायदेमंद रीफ खत्म होते जा रहे हैं। इसके अलावा, नुकसानदायक सनस्क्रीन का इस्तेमाल और बढ़ता पर्यटन भी कोरल रीफ के अस्तित्व के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। इसके अलावा कोरल की खुदाई और अत्यधिक मछली पकड़ना भी एक कारण माना जा रहा है। समुद्री जीवों में से 25% से भी अधिक कोरल रीफ पर ही निवास करते है, समुद्री जीवों के जीवित रहने के लिए कोरल रीफ भोजन और आश्रय का स्रोत हैं।
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वर्ल्ड रीफ डे 2026 (फोटो.सोशल मीडिया)
कोरल रीफ से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य
- प्रवाल भित्तियाँ असल में जीवित समुद्री प्राणी हैं, पौधे नहीं। महासागर में कठोर और कोमल दोनों प्रकार के प्रवाल पाए जाते हैं, जो कॉलोनियों नामक बड़े समूहों में एक साथ रहते हैं।
- कोरल रीफ विभिन्न प्रकार की मछलियों को भोजन प्रदान करती हैं, जो बदले में हमें भोजन प्रदान करती हैं। रीफ-वर्ल्ड फाउंडेशन के अनुसार, विश्व में लगभग 5 करोड़ लोग प्रवाल भित्तियों पर रहने वाली मछलियों का सेवन करते हैं।
- कोरल रीफ को भी हमारी तरह सनलाइट की आवश्यकता होती है। प्रवाल भित्तियाँ स्वच्छ, उथले पानी में पनपती हैं। वे लगभग 70 मीटर गहरे पानी में अच्छी तरह से विकसित होती हैं।
- अत्यधिक गर्मी उनके लिए हानिकारक हो सकती है। प्रवाल और शैवाल (Algae) का एक सुंदर, सहजीवी संबंध है, लेकिन जब महासागर बहुत गर्म हो जाता है, तो प्रवाल शैवाल को बाहर निकाल देते हैं जिससे प्रवाल सफेद हो जाते हैं। इस प्रक्रिया को विरंजन यानी Bleaching कहा जाता है।
- मूंगा यानी रीफ की चट्टानें जल शोधक का काम करती हैं। मूंगा और उनके साथी स्पंज, अक्सर अपने आसपास के महासागर में पाए जाने वाले कणों को खाते हैं। इससे आसपास का पानी साफ और सुंदर रहता है।
- कोरल रीफ लगभग 24 करोड़ वर्ष पुराने हैं।
- ये कोरल रीफ समुद्र में आने वाले तूफान के दौरान एक अवरोधक का काम करते है। मूंगा की चट्टानें तूफानों और जलप्रपातों के दौरान किनारे पर बसे शहरों की रक्षा करती हैं। वे पानी की गति को धीमा करने का काम करती हैं।
