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World Forestry Day: हर मिनट कट रहे 27 फुटबॉल मैदान जितने जंगल, जानें खत्म होते जंगलों की ये डरावनी रिपोर्ट!
- Written By: प्रीति शर्मा
Forest Conservation Awareness: विश्व वानिकी दिवस के मौके पर सामने आई रिपोर्टें चिंता बढ़ाने वाली हैं, जिनके अनुसार हर मिनट तेजी से जंगलों का सफाया हो रहा है।

जंगलों की कटाई का दृश्य (सौ. एआई)
Deforestation Report 2026: धरती के फेफड़े कहे जाने वाले जंगलों को बचाने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए आज पूरा विश्व अंतरराष्ट्रीय वन दिवस मना रहा है। जलवायु परिवर्तन के दौर में वनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि पेड़ों के बिना मानव जीवन की कल्पना असंभव है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2012 में 21 मार्च को अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के रूप में घोषित किया था। वनों का महत्व केवल स्वच्छ हवा और ऑक्सीजन तक सीमित नहीं है, बल्कि ये करोड़ों लोगों को आजीविका, भोजन और आश्रय भी प्रदान करते हैं। इस वर्ष की थीम वनों और नवाचार (Forests and Innovation) पर केंद्रित है जो यह बताती है कि कैसे नई तकनीक के जरिए हम जंगलों की कटाई को रोक सकते हैं और लुप्त हो रही वनस्पतियों को बचा सकते हैं।
ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में प्रकृति प्रेमियों और पर्यावरणविदों के लिए एक परेशान करने वाली खबर सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा जारी ग्लोबल फॉरेस्ट रिसोर्सेज असेसमेंट 2025 (FRA-2025) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक हमारी धरती से हर साल औसतन 1.09 करोड़ हेक्टेयर जंगल खत्म हो रहे हैं। यह क्षेत्रफल मिस्र जैसे बड़े देश के कुल आकार के बराबर है।
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राहत की बात, लेकिन चुनौती बरकरार
रिपोर्ट में एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि 1990 के दशक की तुलना में वनों की कटाई की दर में गिरावट आई है। उस समय प्रति वर्ष लगभग 1.76 करोड़ हेक्टेयर वन क्षेत्र नष्ट हो रहा था जो अब घटकर 1.09 करोड़ हेक्टेयर रह गया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह कमी पर्याप्त नहीं है क्योंकि जिस तेजी से कार्बन उत्सर्जन बढ़ रहा है, उसे सोखने के लिए वनों का विस्तार कहीं अधिक गति से होना चाहिए।
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जंगलों के विस्तार की गति हुई धीमी
रिपोर्ट में एक और चिंताजनक तथ्य यह सामने आया है कि नए वन क्षेत्र विकसित करने की रफ्तार भी सुस्त पड़ गई है। साल 2000 से 2015 के बीच जहां हर साल 9.88 मिलियन हेक्टेयर वन क्षेत्र का विस्तार हो रहा था वहीं अब यह सिमटकर केवल 6.78 मिलियन हेक्टेयर रह गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि हम जितने पेड़ काट रहे हैं उतने नए पेड़ लगाने और उन्हें बचाने में पीछे छूट रहे हैं।
हर व्यक्ति के हिस्से में आधा हेक्टेयर जंगल
आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में पृथ्वी की कुल भूमि का लगभग 31 से 32 प्रतिशत हिस्सा ही वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यदि वैश्विक जनसंख्या के आधार पर इसका औसत निकाला जाए तो दुनिया के हर व्यक्ति के हिस्से में अब केवल 0.5 हेक्टेयर जंगल ही बचा है। जंगलों की यह घटती संख्या जैव विविधता और वन्यजीवों के अस्तित्व के लिए भी बड़ा खतरा है।
दावानल का तांडव
रिपोर्ट में जंगलों में लगने वाली आग को भी विनाश का एक बड़ा कारण बताया गया है। FAO के मुताबिक हर साल औसतन 261 मिलियन हेक्टेयर भूमि आग की चपेट में आती है जिसमें से आधा हिस्सा वनों का होता है। आग की इन घटनाओं ने न केवल वनों को नष्ट किया है बल्कि वायुमंडल में भारी मात्रा में जहरीली गैसें भी छोड़ी हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वनों के संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर कठोर कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में ‘नेट जीरो’ उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करना असंभव होगा।
World forestry day 2026 forest loss every minute shocking report
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