खालिस्तानी चरमपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा, कनाडा की खुफिया रिपोर्ट में बड़ा खुलासा; अब कसेगा शिकंजा!

Khalistani Extremists: कनाडा की खुफिया एजेंसी ने खालिस्तानी चरमपंथियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना है। उनका कहना है कि ये समूह संस्थानों का इस्तेमाल हिंसक एजेंडे और धन जुटाने के लिए कर रहे।
Khalistani Extremists Pose a Threat to National Security: Major Revelation in Canadian Intelligence Report; The Net Is Now Set to Tighten!
मार्क कार्नी, AI मॉडिफाइड फोटो
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Canada Declares Khalistani Extremists:  भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण संबंधों के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कनाडा की मुख्य खुफिया एजेंसी, कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS) ने अपनी वर्ष 2025 की वार्षिक रिपोर्ट में खालिस्तानी चरमपंथियों को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा घोषित कर दिया है। इस रिपोर्ट के आने के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सुरक्षा गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

संस्थानों का दुरुपयोग

कनाडा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी इस रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ खालिस्तानी चरमपंथी कनाडाई नागरिकों और वहां के संस्थानों के साथ गहराई से जुड़े हुए हैं। ये तत्व कनाडाई संस्थानों का लाभ उठाकर समुदाय के निर्दोष और भोले-भाले सदस्यों से भारी मात्रा में धन इकट्ठा करते हैं। चिंताजनक बात यह है कि इस धन का उपयोग बाद में हिंसक चरमपंथी एजेंडे को बढ़ावा देने और भारत के खिलाफ गतिविधियों को संचालित करने के लिए किया जाता है। भारत सरकार ने पहले ही इन अलगाववादी समूहों को आतंकवादी संगठनों की सूची में डाल रखा है, जो भारत के भीतर 'खालिस्तान' नाम से एक अलग देश की मांग करते हैं।

एअर इंडिया हमले की काली छाया

यह रिपोर्ट एअर इंडिया की उड़ान संख्या 182 (कनिष्क) में हुए भीषण बम विस्फोट की 40वीं वर्षगांठ के ठीक एक साल बाद आई है। बता दें कि यह विस्फोट कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला माना जाता है जिसमें 329 बेगुनाह लोगों की जान चली गई थी। जिनमें अधिकांश कनाडाई नागरिक थे। रिपोर्ट में यह साफ बताया गया है कि इस हमले के पीछे कनाडा में मौजूद खालिस्तानी तत्वों का ही हाथ था। हालांकि, खुफिया एजेंसी ने यह भी कहा है कि केवल वे लोग जो हिंसा को बढ़ावा देते हैं या उसकी योजना बनाते हैं उन्हें ही चरमपंथी माना जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, खालिस्तान के समर्थन में शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से अपनी बात रखना उग्रवाद की श्रेणी में नहीं आता है।

बदलते राजनयिक समीकरण

भारत और कनाडा के संबंध साल 2023 में उस वक्त अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर भारत पर आरोप लगाए थे। भारत ने इन आधारहीन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था।

हालांकि, अब सत्ता परिवर्तन के बाद प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशें की जा रही हैं। कनाडा की ओर से खालिस्तानी चरमपंथ को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानना इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे भारत की सुरक्षा चिंताओं को कुछ हद तक राहत मिल सकती है।

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