
सीमा कुमारी
नई दिल्ली: ‘महाशिवरात्रि’ (Mahashivratri) का पावन पर्व इस साल 1 मार्च को है। यह महापर्व फाल्गुन महीने (Falgun Month) के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन देवों के देव महादेव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि, इस दिन व्रत रखने से सौभाग्य में वृद्धि होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
कहते हैं कि, इस दिन रूद्राभिषेक करने से जातक के जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और जातक की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। खासतौर पर यह व्रत लड़कियां मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए रखती हैं। आइए जानें ‘महाशिवरात्रि’ की तिथि, शुभ पूजन-मुहूर्त और पूजा-विधि –
इस साल ‘महाशिवरात्रि’ का शुभ दिन मंगलवार, 1 मार्च को सुबह 3.16 बजे से शुरू होगा। चतुर्दशी तिथि बुधवार, 2 मार्च को सुबह 10 बजे समाप्त होगी। ‘महाशिवरात्रि’ की पूजा चार चरणों में की जाती है।
प्रथम चरण पूजा: 1 मार्च शाम 6.21 बजे से रात 9.27 बजे तक ।
दूसरे चरण की पूजा: 1 मार्च रात 9.27 बजे से 12.33 बजे तक ।
तीसरे चरण की पूजा: 2 मार्च को दोपहर 12:33 से 3.39 बजे तक ।
चौथे चरण की पूजा: 2 मार्च को सुबह 3:39 बजे से सुबह 6:45 बजे तक ।
‘महाशिवरात्रि’ के दिन ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर लें।
इसके उपरांत एक चौकी पर जल से भर हुए कलश की स्थापना कर शिव-पार्वती की मूर्ति या चित्र रखें।
इसके बाद रोली, मौली, अक्षत, पान सुपारी ,लौंग, इलायची, चंदन, दूध, दही, घी, शहद, कमलगटटा्, धतूरा, बिल्व पत्र, कनेर आदि अर्पित करें।
इसके बाद भगवान शिव की आरती पढ़ें।
यदि आप रात्रि जागरण करते हैं तो उसमें भगवान शिव के चारों प्रहर में आरती करने का विधान है।
‘महाशिवरात्रि’ का व्रत भगवान शिव शंकर को समर्पित है। मान्यता है कि, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना और व्रत करने से मनचाहे जीवन साथी की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, वैवाहिक जीवन भी खुशहाल रहता है व विवाह में आने वाली सभी विघ्न बाधाएं दूर हो जाती है।
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, फाल्गुन मास के चतुर्दशी को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक कर विधिवत भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन किया जाता है। कहते हैं कि, ऐसा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और महादेव का आशीर्वाद सदैव बना रहता है। बता दें कि महाशिवरात्रि शिव और माता पार्वती के विवाह की रात्रि मानी जाती है।






