

शुरुआत में हल्के वजन और सही एक्सरसाइज फॉर्म पर ध्यान दें।
संतुलित डाइट, प्रोटीन और पर्याप्त नींद को प्राथमिकता दें।
अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे वर्कआउट की इंटेंसिटी बढ़ाएं।
Fitness Tips For Beginners: अगर आप भी साल के अंत में जिम जाने या अपनी फिटनेस के प्रति सजग होने की सोच रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। कई लोग पहले ही दिन ज्यादा वजन उठाने लगते हैं या जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज कर लेते हैं। इससे मांसपेशियों में दर्द, थकान और चोट का खतरा बढ़ जाता है।
अगर आप भी फिटनेस रूटीन शुरू कर रहे हैं, तो शुरुआती सात दिनों में कुछ गलतियों से बचना जरूरी है। इससे शरीर को ट्रेनिंग की आदत डालने और धीरे-धीरे ताकत बढ़ाने में मदद मिलेगी।
वर्कआउट न करने से शरीर की ताकत और सहनशक्ति पहले जैसी नहीं रहती। ऐसे में शुरुआत में ही भारी डंबल या बारबेल उठाने से बचें। हल्के वजन से शुरुआत करें और सही फॉर्म पर ध्यान दें। जब एक्सरसाइज आसानी से होने लगे और आप फॉर्म को समझ जाएं, तब धीरे-धीरे वजन बढ़ाएं।
सीधे मशीन या डंबल उठाने से पहले शरीर को तैयार करना जरूरी है। वर्कआउट से पहले 5-10 मिनट हल्की वॉक, साइकिलिंग या डायनेमिक स्ट्रेचिंग करें। इससे शरीर ट्रेनिंग के लिए तैयार होता है और मूवमेंट बेहतर तरीके से कर पाते हैं।
मसल्स को मजबूत बनाने के लिए एक्सरसाइज के साथ रिकवरी भी जरूरी है। लगातार एक ही मसल ग्रुप को ट्रेन करने से थकान बढ़ती है। शुरुआत में पूरे शरीर की हल्की ट्रेनिंग या अलग-अलग मसल ग्रुप के लिए संतुलित रूटीन अपनाएं। एक ही मसल को दोबारा ट्रेन करने से पहले पर्याप्त रिकवरी का समय दें।
फिटनेस दोबारा शुरू करते ही लंबे समय तक ट्रेडमिल पर दौड़ना या बहुत ज्यादा कार्डियो करना जरूरी नहीं है। शुरुआत में अपनी क्षमता के अनुसार 10-15 मिनट की हल्की वॉक या साइकिलिंग कर सकते हैं। धीरे-धीरे समय और इंटेंसिटी बढ़ाएं।
सिर्फ जिम में पसीना बहाने से मसल्स नहीं बनतीं। शरीर को प्रोटीन से भरपूर फूड, कार्बोहाइड्रेट, हेल्दी फैट और दूसरे पोषक तत्व भी चाहिए। खाने में दाल, दूध, दही, पनीर, सोया, अंडे और अन्य प्रोटीन स्रोत शामिल करें। अपनी जरूरत के हिसाब से संतुलित भोजन करें।
रोजाना कठिन वर्कआउट करने के बजाय शरीर को आराम देना भी जरूरी है। पर्याप्त नींद लें और एक ही मसल ग्रुप को लगातार ट्रेन करने से बचें। मांसपेशियों में हल्का दर्द सामान्य हो सकता है, लेकिन तेज दर्द या सूजन हो, तो नजरअंदाज न करें।
जिम में कोई कितना वजन उठा रहा है या कितनी तेजी से फिट हो रहा है, इससे अपनी प्रोग्रेस तय न करें। हर व्यक्ति की क्षमता और फिटनेस लेवल अलग होता है। अपने वर्कआउट, वजन और रेप्स को ट्रैक करें। छोटे-छोटे सुधारों पर ध्यान दें।
हल्की फुल बॉडी ट्रेनिंग और वॉर्मअप।
हल्की वॉक और मोबिलिटी एक्सरसाइज।
कम वजन के साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग।
रिकवरी और हल्की एक्टिविटी।
फुल बॉडी या अलग मसल ग्रुप की ट्रेनिंग।
हल्का कार्डियो और स्ट्रेचिंग।
आराम करना।