Diwali Air Pollution: दिवाली पर पटाखों के धुएं से कैसे बचाएं आंखें और फेफड़े? जानें जरूरी सावधानियां

Diwali Pollution: दिवाली पर पटाखों से निकलने वाला धुआं आंखों में जलन और फेफड़ों में परेशानी बढ़ा सकता है। जानिए बच्चों, बुजुर्गों और परिवार के दूसरे सदस्यों को प्रदूषण से बचाने के तरीके।
Diwali pollution how to protect eyes lungs firecracker smoke.
दीवाली पॉल्यूशनफोटो.सोशल मीडिया
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Highlights:

  • पटाखों का धुआं आंखों में जलन और सांस की परेशानी बढ़ा सकता है।

  • प्रदूषण के दौरान N95 मास्क पहनें और आउटडोर एक्सरसाइज टालें।

  • अस्थमा के मरीज दवाइयां पास रखें और लक्षण बढ़ने पर डॉक्टर से मिलें।

Diwali Pollution Safety: दिवाली पर पटाखों और आतिशबाजी के बीच हवा में घुलने वाला धुआं सेहत के लिए परेशानी बढ़ा देता है। पटाखों से निकलने वाले धुएं में पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे बारीक कणों के साथ कई अन्य प्रदूषक भी होते हैं। ये सांस के रास्ते फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं। साथ ही इनसे आंखों में जलन, खुजली व पानी आने लगती हैं। अस्थमा, एलर्जी और सांस की बीमारी से ग्रसित लोगों, बच्चों और बुजुर्गों को दीवाली में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

पटाखे जलने पर निकलने वाला धुआं आंखों की सतह में जाकर जलन पैदा करता है। इससे आंखों में लालिमा, जलन, खुजली, सूखापन और लगातार पानी आने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। वहीं, हवा में मौजूद बारीक प्रदूषक कण सांस के साथ शरीर में पहुंचकर खांसी, गले में खराश, सीने में जकड़न और सांस लेने में परेशानी पैदा करते हैं।

आंखों को धुएं से बचाने के टिप्स

धुएं और पटाखों से दूरी बनाकर रखें

पटाखे जलाने वाली जगह के पास खड़े होकर आतिशबाजी न देखें। आंखों को बचाने के लिए एक सुरक्षित दूरी बनाकर रखें। अगर आसपास बहुत धुआं हो तो उस जगह से हट जाएं।

बाहर निकलते समय चश्मा पहनें

धूल और धुएं से आंखों को बचाने के लिए अच्छी तरह फिट होने वाला चश्मा या प्रोटेक्टिव आईवियर पहन सकते हैं। पटाखे जलाते समय आंखों की सुरक्षा के लिए सामान्य चश्मे के बजाय उपयुक्त सेफ्टी गॉगल्स भी बेहतर हैं।

आंखों को बार-बार न रगड़ें

धुएं या धूल से आंखों में खुजली और जलन होने पर उन्हें रगड़ने से बचें। इससे आंखों की लेयर्स पर परेशानी बढ़ सकती है। हल्की जलन हो, तो साफ पानी से आंखों को धीरे से धो सकते हैं।

कॉन्टैक्ट लेंस पहनने में सावधानी रखें

पटाखों के धुएं और धूल के बीच कॉन्टैक्ट लेंस से आंखों में परेशानी बढ़ती है। ऐसे माहौल में चश्मे को प्राथमिकता दें। आंखों में जलन या असहजता होने पर लेंस का इस्तेमाल न करें।

तेज दर्द या धुंधला दिखने पर डॉक्टर को दिखाएं

आंखों में लगातार लालिमा, दर्द, रोशनी से परेशानी या धुंधला दिखने को नजरअंदाज न करें। पटाखे का कण या चिंगारी आंख में जाने पर खुद उसे निकालने की कोशिश न करें और डॉक्टर से मिलें।

फेफड़ों को धुएं से बचाने के लिए बरतें 5 सावधानियां

प्रदूषण बढ़ने पर घर के अंदर रहें

दिवाली की रात और उसके बाद हवा में प्रदूषण बढ़ सकता है। ऐसे में खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी वाले लोगों को बेवजह बाहर निकलने से बचना चाहिए। घर से बाहर जाने से पहले एक्यूआई जरूर चेक करें।

जरूरत पड़ने पर N95 मास्क पहनें

प्रदूषण के दौरान बाहर निकलना जरूरी हो तो अच्छी फिटिंग वाला एन95 मास्क पहनें। यह हवा में मौजूद कई बारीक कणों को श्वास नली में जाने से बचाता है। सामान्य कपड़े से बने मास्क ऐसे में काम नहीं आते हैं।

सुबह की सैर और आउटडोर एक्सरसाइज टालें

अगर आपके शहर में एक्यूआई खराब है तो पार्क में दौड़ने, साइकिल चलाने या तेज एक्सरसाइज करने से बचें। प्रदूषण के दौरान शारीरिक मेहनत करने से ज्यादा प्रदूषित हवा सांस के साथ अंदर जा सकती है। घर के अंदर हल्की एक्टिविटी करें।

घर में धुआं जमा न होने दें

धुएं के ज्यादा होने पर खिड़की-दरवाजे बंद रखें। घर में अगरबत्ती, धूप या ऐसी चीजें जलाने से भी बचें जिनसे अतिरिक्त धुआं पैदा होता है। हवा की गुणवत्ता बेहतर होने पर ही वेंटिलेशन करें।

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दवाइयां और इनहेलर पास रखें

अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोग अपनी डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयां और इनहेलर पास रखें। बिना सलाह दवा न बदलें। सांस फूलने या सीने में जकड़न बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

कब तुरंत डॉक्टर की मदद लें?

अगर सांस लेने में गंभीर परेशानी, सीने में दर्द, बेहोशी या आंखों में तेज दर्द और धुंधला दिखने जैसी समस्या हो तो घरेलू उपायों में समय न गंवाएं। तुरंत मेडिकल हेल्प लें।