Gupt Navratri Special: लौंग से लेकर शहद तक, गुप्त नवरात्रि के इन प्रसादों में छिपा है आयुर्वेद का खजाना

Navratri Special: गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी को अर्पित किए जाने वाले लौंग, शहद, मिश्री और अन्य प्रसाद न सिर्फ आध्यात्मिक लाभ देते बल्कि सेहत के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है।
Sacred Offerings And Ayurvedic Benefits Of Gupt Navratri
गुप्त नवरात्रि में देवी को अर्पित प्रसाद
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Gupt Navratri Bhog Benefits: माघ गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व 19 जनवरी से शुरू हो रहा है। इस दौरान दस महाविद्याओं की साधना में भक्त कई विशेष वस्तुएं अर्पित करते हैं। आयुर्वेद के अनुसार देवी को चढ़ाई जाने वाली ये चीजें जैसे ज्वारे का रस, गुड़ और तिल औषधीय गुणों का भंडार हैं जो पाचन, श्वसन और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूती देती हैं।

19 जनवरी 2026 से माघ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है। शक्ति की उपासना के इन नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों को प्रसन्न करने के लिए विशेष भोग अर्पित किए जाते हैं। ज्योतिष और धर्म के साथ-साथ इन प्रसादों का आयुर्वेद में भी बहुत महत्व है। ये चीजें न केवल श्रद्धा का प्रतीक हैं बल्कि सर्दियों के इस मौसम में शरीर को निरोगी रखने का विज्ञान भी हैं।

लौंग और इलायची

श्वसन और पाचन का रक्षक देवी को प्रिय लौंग में यूजेनॉल होता है जो दांत दर्द और माइग्रेन में नेचुरल पेन किलर का काम करता है। वहीं इलायची त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) को शांत करती है और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखती है। ये दोनों ही चीजें श्वसन तंत्र को साफ कर खांसी और सर्दी में राहत देती हैं।

ज्वारे का रस और शहद

शरीर के लिए अमृत कलश स्थापना के दौरान बोए जाने वाले ज्वार (ज्वारे का रस) को आयुर्वेद में ग्रीन ब्लड कहा जाता है। यह ब्लड शुगर कंट्रोल करने और डिटॉक्सिफिकेशन में सहायक है। इसी तरह शहद जिसे मां चंद्रघंटा को भी अर्पित किया जाता है एक योगवाही औषधि है। यह अन्य दवाओं के असर को बढ़ाता है और गले की खराश व इम्यूनिटी के लिए अचूक है।

गुड़ और तिल

ऊर्जा और हड्डियों की मजबूती नवरात्रि के पहले दिन मां काली को गुड़ का भोग लगाया जाता है। आयरन से भरपूर गुड़ एनीमिया को दूर करता है। वहीं तिल जो कैल्शियम का भंडार है वात दोष को शांत कर हड्डियों को मजबूती देता है। सर्दियों में इनका सेवन शरीर को गर्म रखने और जोड़ों के दर्द को कम करने में मददगार होता है।

पान का पत्ता और किशमिश

डिटॉक्स और खून की शुद्धि नौ दुर्गा और दस महाविद्याओं को प्रिय पान का पत्ता एक बेहतरीन एंटीसेप्टिक है। यह कब्ज और एसिडिटी को दूर कर पाचन में सुधार करता है। साथ ही किशमिश का सेवन आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स की कमी को पूरा कर खून साफ करता है और त्वचा में चमक लाता है।

इन पवित्र वस्तुओं का गुप्त नवरात्रि में भोग लगाना और प्रसाद के रूप में ग्रहण करना आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ शारीरिक कायाकल्प का भी माध्यम बनता है।

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