तनाव में सिर पकड़े व्यक्ति (सौ. एआई)
Brain Damage Habits: इंसानी दिमाग शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है लेकिन हमारी खराब लाइफस्टाइल इसे समय से पहले बूढ़ा बना रही है। विशेषज्ञों के अनुसार दिनभर की भागदौड़ में हम अक्सर ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो धीरे-धीरे हमारे न्यूरॉन्स को डैमेज करती हैं और सोचने समझने की शक्ति को कम कर देती हैं।
आधुनिक जीवनशैली में तनाव और काम का बोझ इतना बढ़ गया है कि हम अपनी मानसिक सेहत को नजरअंदाज करने लगे हैं। मेडिकल रिसर्च और विशेषज्ञों की मानें तो कुछ ऐसी आदतें हैं जो हमारे मस्तिष्क के लिए धीमे जहर की तरह काम करती हैं। अगर आप भी भूलने की बीमारी या मानसिक थकान महसूस कर रहे हैं तो तुरंत इन आदतों पर गौर करें।
मस्तिष्क को खुद को रिपेयर करने के लिए 7-8 घंटे की गहरी नींद की जरूरत होती है। जब आप कम सोते हैं तो दिमाग के टॉक्सिन्स बाहर नहीं निकल पाते। इससे न केवल एकाग्रता कम होती है बल्कि लंबे समय में अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
ज्यादा मीठा खाना सिर्फ वजन ही नहीं बढ़ाता बल्कि यह दिमाग के ब्रेन-डिराइव्ड न्यूरोट्रॉफिक फैक्टर (BDNF) को कम कर देता है। इसके बिना दिमाग नई चीजें सीखने और पुरानी यादें संजोने में असमर्थ होने लगता है।
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इंसानी दिमाग सामाजिक संपर्क से विकसित होता है। जो लोग खुद को कमरे में बंद रखते हैं या लोगों से बातचीत कम करते हैं उनके मस्तिष्क में संकुचन होने लगता है। अकेलापन डिप्रेशन और मानसिक गिरावट की गति को तेज कर देता है।
अगर आप घंटों तक तेज आवाज में हेडफोन लगाकर गाने सुनते हैं तो सावधान हो जाएं। यह न केवल सुनने की क्षमता को प्रभावित करता है बल्कि दिमाग के टिशूज को भी नुकसान पहुंचाता है जिससे सोचने की क्षमता प्रभावित होती है।
सुबह का नाश्ता न करने से दिमाग को जरूरी ग्लूकोज और पोषक तत्व नहीं मिल पाते। इससे ब्रेन सेल्स को एनर्जी नहीं मिलती और आप दिनभर मानसिक रूप से सुस्त महसूस करते हैं।
दिमाग की सेहत को बनाए रखने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद लेना अनिवार्य है। अपनी इन छोटी-छोटी आदतों को बदलकर आप बुढ़ापे तक अपने दिमाग को तेज और स्वस्थ रख सकते हैं।