मानसून में डायबिटीज मरीजों को क्यों रहना चाहिए ज्यादा सतर्क? जानें जरूरी हेल्थ टिप्स
Diabetes Care Tips During Monsoon: बारिश के मौसम में डायबिटीज मरीजों को खानपान, स्वच्छता और ब्लड शुगर कंट्रोल का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जानिए मानसून में सेहतमंद रहने के लिए जरूरी हेल्थ टिप्स और बचाव के आसान उपाय।
- Written By: वंदना शर्मा
मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं दूसरी ओर यह कई तरह के संक्रमण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ा देता है। डायबिटीज से पीड़ित लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य लोगों की तुलना में कमजोर हो सकती है, जिससे बैक्टीरिया और वायरस का संक्रमण जल्दी पकड़ सकता है। इस मौसम में ब्लड शुगर का स्तर भी कई कारणों से प्रभावित हो सकता है। इसलिए डायबिटीज मरीजों को खानपान, दवाइयों और दैनिक दिनचर्या पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
आपका मानसून के दौरान शरीर की गतिविधियों और खानपान में बदलाव आने से ब्लड शुगर का स्तर ऊपर-नीचे हो सकता है। लेकिन ऐसे में नियमित अंतराल पर ग्लूकोज की जांच करना बेहद जरूरी है। अगर आपका ब्लड शुगर सामान्य से ज्यादा या कम नजर आए तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा या इंसुलिन की मात्रा में बदलाव करें। तो बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं में बदलाव करना नुकसानदायक हो सकता है।
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इस बारिश के मौसम में सड़क किनारे मिलने वाले खाद्य पदार्थ जल्दी दूषित हो सकते हैं। आपके शरीर में ऐसे भोजन से फूड पॉइजनिंग, पेट का संक्रमण और ब्लड शुगर असंतुलित होने का खतरा बढ़ जाता है। हमेशा डायबिटीज मरीजों को ताजा, घर का बना और संतुलित भोजन ही प्राथमिकता देनी चाहिए। साथ ही मीठे पेय पदार्थ और अधिक तेल-मसाले वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाकर रखें।
डायबिटीज मरीजों के लिए पैरों की देखभाल बेहद महत्वपूर्ण होती है। बारिश में गीले जूते या लंबे समय तक नमी रहने से फंगल इंफेक्शन और घाव होने का खतरा बढ़ सकता है। रोजाना पैरों को अच्छी तरह धोकर सुखाएं, साफ मोजे पहनें और आरामदायक व सूखे जूतों का इस्तेमाल करें। अगर किसी तरह का कट, छाला या घाव दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
इस बारिश के मौसम में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर को हाइड्रेट रखना उतना ही जरूरी है। आपका शरीर पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्म बेहतर रहता है और आपके ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में भी मदद मिल सकती है। मीठे ड्रिंक्स की जगह सादा पानी, नींबू पानी या डॉक्टर की सलाह के अनुसार अन्य हेल्दी विकल्प चुनें।
मानसून में वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम, त्वचा संक्रमण और यूरिन संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इस मौसम में डायबिटीज के मरीजों में संक्रमण होने पर ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है। यदि आपको बुखार, लगातार कमजोरी, पेशाब में जलन, त्वचा पर लालिमा या घाव भरने में देरी जैसी समस्याएं दिखें तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।
बारिश की वजह से कई लोग बाहर टहलना बंद कर देते हैं, जिससे शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है। इससे ब्लड शुगर बढ़ने का खतरा रहता है। अगर बाहर जाना संभव न हो तो घर के अंदर योग, स्ट्रेचिंग, हल्की एक्सरसाइज या तेज चाल से चलने जैसी गतिविधियां करें। रोजाना कम से कम 30 मिनट सक्रिय रहने की कोशिश करें।
मानसून में नमी अधिक होने के कारण दवाइयों और इंसुलिन को सही तापमान पर सुरक्षित रखना जरूरी है। एक्सपायरी डेट की जांच करते रहें और दवा समय पर लें। अगर किसी कारण से दवा छूट जाए या ब्लड शुगर लगातार असामान्य रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेने में देरी न करें।
आपकी कम नींद और अधिक तनाव का सीधा असर ब्लड शुगर पर पड़ सकता है। इस मानसून में मौसम बदलने के कारण कई लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो जाती है। आप अपना रोजाना 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें, समय पर भोजन करें और ध्यान, प्राणायाम या मेडिटेशन जैसी गतिविधियों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
हर डायबिटीज मरीज की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है। इसलिए किसी भी डाइट, दवा या एक्सरसाइज में बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। उसके बाद नियमित हेल्थ चेकअप, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर मानसून के दौरान भी ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित रखा जा सकता है।
