Aman Saw Encounter Case: झारखंड HC ने लिया स्वत: संज्ञान, परिवार ने लगाया था आरोप, बढ़ी सरकार की मुश्किलें

Aman Saw Encounter Case Update: हाईकोर्ट ने मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा कि मामले की संवेदनशीलता और एनकाउंटर की सत्यता पर उठ रहे सवालों के बीच सच्चाई जानने के लिए केस डायरी का अवलोकन जरूरी है।
Aman Saw Encounter Case: Jharkhand High Court Takes Suo Motu Cognizance; Family Had Alleged Misconduct, Government's Troubles Mount.
झारखंड हाई कोर्ट (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Jharkhand High Court Hearing Aman Saw Encounter Case: झारखंड के चर्चित गैंगस्टर अमन साव के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने की घटना में राज्य सरकार से झारखंड हाईकोर्ट ने सीआईडी की केस डायरी तलब कर ली है। हाईकोर्ट मामले पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। मामले की संवेदनशीलता और एनकाउंटर की सत्यता पर उठ रहे सवालों के बीच हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि सच्चाई जानने के लिए केस डायरी का अवलोकन जरूरी है। बता दें कि अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 जून को तय की गई है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष दो अलग-अलग पक्ष सामने आए।

पुलिस पर हत्या का आरोप

पुलिस का दावा है अमन साव को जब छत्तीसगढ़ की रायपुर जेल से रांची होटवार जेल लाया जा रहा था, तब उसे छुड़ाने के लिए पुलिस पर हमला हुआ था और इसी दौर अमन भागने की कोशिश कर रहा था। जवाब में पुलिस को एनकाउंटर करना पड़ा। वहीं दूसरी ओर, अमन साव के परिजनों ने इसे सुनियोजित 'फर्जी एनकाउंटर' करार दिया है। अमन साव की मां ने इस पूरे घटनाक्रम को एक साजिश बताते हुए आरोप लगाया है कि पुलिस ने जानबूझकर उनके बेटे की हत्या की है। परिजनों ने मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई (जांच की मांग की है।

FIR दर्ज न करने का आरोप

याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में दलील दी कि पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी केवल एनकाउंटर और भागने के एंगल पर केंद्रित है, जबकि परिवार के आरोपों का पहलू पूरी तरह अलग है। उन्होंने मांग की कि परिवार के आरोपों के आधार पर दूसरी एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। वकील का आरोप है कि मां द्वारा कराई गई ऑनलाइन एफआईआर को अब तक रजिस्टर नहीं किया गया है।

दूसरी FIR जरूरत नहीं- सरकार

मामले पर झारखंड सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कहा गया कि सीआईडी एक ही केस में सभी बिंदुओं की विस्तृत जांच कर रही है, इसलिए अलग से दूसरी एफआईआर दर्ज करने की आवश्यकता नहीं है। बता दें कि इस मामले में देरी और एफआईआर दर्ज न होने को लेकर हाईकोर्ट पहले भी सरकार को फटकार लगा चुका है। कोर्ट ने पूर्व में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और प्रक्रिया के तहत एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है।

एजेंसी इनपुट के साथ...

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