

Pune Municipal Corporation Swimming Pool Ban: पुणे और उसके आसपास के इलाकों में पानी की भारी किल्लत को देखते हुए महानगर पालिका प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत शहर के सभी सार्वजनिक और निजी स्विमिंग पूलों को तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश जारी किए जा रहे हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य इस समय पीने के पानी की बर्बादी को रोकना और उपलब्ध जल संसाधनों का सही तरीके से प्रबंधन करना है।
गर्मियों के मौसम में पानी की मांग चरम पर पहुंच गई है, जिसके कारण शहर के कई प्रमुख रिहायशी इलाकों जैसे कि कात्रज, हडपसर, वाघोली और बावधन में पानी की भारी किल्लत महसूस की जा रही है। इन क्षेत्रों के नागरिकों को दैनिक उपयोग के लिए पूरी तरह से पानी के टैंकरों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
विनय मराठे शिव छत्रपति पुरस्कार से सम्मानित और तैराकी कोच विनय मराठे ने फैसले का कड़ा विरोध करते हुए पीएमसी को पत्र लिखा है। उन्होंने चेतावनी दी कि पूलों को खाली करने से बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। स्विमिंग पूलों में लगभग 4 से 5 लाख लीटर क्लोरीनयुक्त पानी होता है। यदि पूलों को बंद किया जाता है, तो इस ट्रीटेड पानी को गटर में बहाना पड़ेगा। क्लोरीन की मौजूदगी के कारण इस पानी का उपयोग खेती या बागवानी के लिए नहीं हो सकता।
मराठे ने कहा, 'अगर शहर के सभी पूलों से लाखों लीटर पानी एक साथ बहाया गया, तो बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी और सड़कों पर बाढ़ आ जाएगी।' प्रशासन के जल संकट के तर्क को खारिज करते हुए कोच ने स्पष्ट किया कि स्विमिंग पूलों का पानी हर दिन नहीं बदला जाता, बल्कि उसे रोटेट किया जाता है।
एक पूल को हर हफ्ते केवल 10,000 लीटर ताजे पानी की आवश्यकता होती है। नागरिकों ने फैसले का स्वागत तो किया है, लेकिन कहा है कि सिर्फ पूल बंद करना स्थाई समाधान नहीं है, प्रशासन को टैंकर माफिया और लीकेज पर लगाम लगानी होगी।