
कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
BJP Internal Politics: नितिन नबीन को जब से भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया तब से हर कोई यह डिकोड करने में लगा हुआ है कि आखिर 10 करोड़ कार्यकर्ताओं वाली पार्टी में नितिन नबीन को ही क्यों कमान दी गई। आने वाले समय में असम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव होने हैं। लेकिन नितिन नबीन का इन तीनों ही राज्यों से ताल्लुक नहीं है।
इसके साथ ही नितिन नबीन कायस्थ परिवार से आते हैं। यानी वह सवर्ण कैटेगरी से हैं, जो कि पहले से ही बीजेपी का कोर वोटर माना जाता है। ऐसे में अन्य कैटेगरीज को लुभाने वाला चेहरा चाहिए था पर ऐसा नहीं किया गया। लेकिन अब सियासी फिजाओं से उनके अध्यक्ष बनाने के पीछे का मकसद सुगबुगाहट बनकर बाहर आने लगा है।
वरिष्ठ राजनैतिक पत्रकार विश्व दीपक ने नितिन नबीन को अध्यक्ष बनाए जाने के पीछे की एक दिलचस्प कहानी बताई है। उन्होंने एक ब्लॉग में लिखा कि असल में नबीन उस शतरंज का छोटा सा प्यादा हैं, जिसकी बिसात पर 2029 लोकसभा चुनाव के पहले बड़ा सियासी खेल खेला जाने वाला है।
उन्होंने आगे लिखा कि उस खेल की गोटियां अभी से सेट की जा रही हैं। उन्होंने इस खेल का नाम ‘मोदी के बाद कौन बनेगा पीएम?’ बताया है। जिसके पहले खिलाड़ी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह होंगे तो दूसरी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। हो सकता है कि कोई डार्क हॉर्स बनकर भी आ जाए, लेकिन ऐसा शायद ही होगा।
विश्व दीपक लिखते हैं कि पहले तो ऐसा नहीं लगता था पर इधर बीच अमित शाह की बॉडी लैंग्वेज, मीडिया-जनता के साथ उनका संवाद आदि देखकर पता चलता है कि वो अपने आप को मोदी के उत्तराधिकारी के तौर पर पेश कर रहे हैं। मोदी की विरासत पर मेरा दावा है- ऐसा अमित शाह की भाव भंगिमाओं से स्पष्ट होता है। ऐसा होना स्वाभाविक भी है। क्योंकि वो मोदी के सबसे भरोसेमंद और सबसे पुराने दोस्त, सहकर्मी हैं।
पीएम मोदी व नितिन नबीन (सोर्स- सोशल मीडिया)
दूसरी तरफ सीएम योगी आदित्यनाथ स्वयं को भाजपा और संघ की हिंदुत्व वाली विरासत का असली दावेदार मानते हैं। इस मामले में उनको कोई चुनौती भी नहीं दे सकता है। इस परिप्रेक्ष्य में देखा जाय तो बीजेपी का अगला अंत: संघर्ष मोदी की विरासत बनाम हिंदुत्व की सियासत के बीच होगा।
विश्व दीपक ने आगे लिखा कि जनाधार हीन और 12वीं पास विधायक नितिन नबीन की भूमिका इस संघर्ष में हालांकि बहुत छोटी है, लेकिन मौका पड़ने पर अहम हो जाएगी। क्योंकि राजनीति में कई बार नगण्य होना अहम हो जाता है। नबीन जीरो थे इसी वजह से उन्हें हीरो बना दिया गया। उनके नाम का सहमति पिछले महीने अंडमान में हुई भागवत और शाह की मीटिंग के दौरान बनी।
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एक और वरिष्ठ पत्रकार कूमी कपूर लिखती हैं कि अमित शाह धर्मेन्द्र प्रधान या भूपेन्द्र यादव को चाहते थे। लेकिन RSS गुजराती लॉबी के बाहर का कोई आदमी चाहता था। अंत में जनाधार हीन और महज 12वीं पास विधायक नितिन नबीन का नाम तय कर दिया गया। हालांकि मेरा मानना है कि नबीन गजुराती लॉबी के ही हैं। वो वही करेंगे जो मोदी-शाह कहेंगे।
खैर! नितिन नबीन के नाम पर संघ की भी मुहर लग चुकी है। ऐसे में ‘मोदी के बाद कौन बनेगा पीएम?’ नामक खेल के दूसरे खिलाड़ी योगी आदित्यनाथ को अब अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ेगी। फिलहाल यह सियासी चर्चाएं हैं। आगे क्या कुछ होता है देखना काफी दिलचस्प होने वाला है।
Ans: राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक नितिन नबीन की नियुक्ति सिर्फ मौजूदा चुनावी राज्यों से जोड़कर नहीं देखी जा सकती। उन्हें एक ऐसे संतुलित चेहरे के रूप में आगे लाया गया है, जो बड़े नेताओं के बीच चल रही भावी सत्ता की शतरंज में एक रणनीतिक भूमिका निभा सकता है, खासकर 2029 लोकसभा चुनाव से पहले।
Ans: वरिष्ठ पत्रकारों के विश्लेषण के अनुसार इस दौड़ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। अमित शाह को मोदी की राजनीतिक विरासत का उत्तराधिकारी माना जा रहा है, जबकि योगी आदित्यनाथ हिंदुत्व की सियासत के सबसे मजबूत चेहरे के तौर पर देखे जाते हैं।
Ans: नितिन नबीन को एक अपेक्षाकृत ‘न्यूट्रल’ और जनाधार-हीन चेहरा माना जा रहा है, जिससे पार्टी के भीतर किसी एक गुट को खुला लाभ न मिले। माना जा रहा है कि उनकी मौजूदगी आने वाले समय में मोदी की विरासत और हिंदुत्व की राजनीति के बीच होने वाले आंतरिक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है।






