16 मार्च को चैत्र महीने का दूसरा प्रदोष व्रत, जानिए इस व्रत के प्रमुख लाभ और महत्व

Pradosh Vrat Benefits: 16 मार्च को चैत्र मास का प्रदोष व्रत रखा जाएगा। माना जाता है कि इसे श्रद्धा के साथ करने से घर में सुख-शांति, आर्थिक समृद्धि और जीवन की समस्याएं दूर होती हैं।
Pradosh Vrat Benefits
प्रदोष व्रत(सौ.सोशल मीडिया)
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Pradosh Vrat Benefits: 16 मार्च को चैत्र महीने का दूसरा प्रदोष व्रत रखा जाने वाला है। सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का बड़ा महत्व होता हैं। भगवान शिव को समर्पित यह व्रत कृष्‍ण और शुक्‍ल पक्ष में त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत फलदायी उपवास है, जो त्रयोदशी तिथि को किया जाता है।

इस व्रत से सभी पाप नष्ट होते हैं, मनोकामनाएं पूरी होती हैं, दरिद्रता दूर होती है और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि आती है। सूर्यास्त के समय (गोधुली बेला) महादेव की पूजा करने से उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।

प्रदोष व्रत के प्रमुख लाभ और महत्व

संतान और वैवाहिक सुख

नि:संतान दंपत्तियों के लिए यह व्रत बहुत शुभ है; यह सुखी वैवाहिक जीवन और संतान प्राप्ति में मदद करता है।

आर्थिक समृद्धि और कर्ज मुक्ति

आर्थिक समस्याओं का समाधान होता है, और यह व्रत कर्ज से मुक्ति दिलाने में सहायक माना जाता है।

दोषों का निवारण

कुंडली में मौजूद चंद्र दोष और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से मुक्ति मिलती है।

घर में सुख-समृद्धि

भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत से परिवार में शांति और सौहार्द बढ़ता है।

जीवन में बाधाओं का नाश

श्रद्धा और भक्ति से किया गया प्रदोष व्रत जीवन की बाधाओं और कठिनाइयों को कम करने में मदद करता है। भक्त मानते हैं कि व्रत से शिव की कृपा प्राप्त होती है और सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं।

प्रदोष व्रत के क्या है मुख्य नियम

  • तिथि और समय: त्रयोदशी तिथि के दिन सूर्यास्त के समय, यानी प्रदोष काल में शिव जी की पूजा करना सबसे जरूरी है।
  • संकल्प और उपवास: सुबह जल्दी उठकर स्नानादि के बाद 'मैं अपनी सभी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए प्रदोष व्रत का पालन करूंगा/करूंगी' का संकल्प लें।
  • पूजा विधि: शाम को दोबारा स्नान करके भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और नंदी की पूजा करें। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, घी और बेलपत्र अर्पित करें।
  • भोग व आरती: शिव जी को खीर या फल का भोग लगाएं और आरती करें।भोजन (पारण): पूरे दिन उपवास रखें या शाम को पूजा के बाद केवल फल व सात्विक भोजन लें, जिसमें अनाज का सेवन न करें।
  • जाप और कथा: दिन भर 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें और शाम को प्रदोष व्रत की कथा सुनें।
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