चूहों ने कराई 'मैडम' की बेल! रिश्वत के नोटों को कुतरा तो सुप्रीम कोर्ट भी रह गया हैरान; जाने क्या है मामला?

Rats Ate Bribe Money Bail News: मुख्य साक्ष्य के रूप में जब्त किए गए रिश्वत की रकम के बारे में दावा किया जा रहा है कि साक्ष्य चूहों ने कुतर डाला। मामले पर शीर्ष अदालत द्वारा जमानत देने की खबर आई है।
Rats Secure 'Madam's' Bail! Supreme Court Left Astonished After Rodents Gnaw Through Bribe Money; Find Out What the Case Is All About.
सुप्रीम कोर्ट (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Supreme Court Rats Ate Bribe Money Bail: देश की अदालतों में अक्सर हैरान करने वाले नए-नए मामले सामने आते रहते हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। इसने अदालत में उपस्थित जजों को भी हैरानी में डाल दिया। हैरान करने वाला ये मामला भ्रष्टाचार से संबंधित है। यहां मुख्य साक्ष्य के रूप में जब्त किए गए रिश्वत की रकम के बारे में दावा किया जा रहा है कि साक्ष्य चूहों ने कुतर डाला। अब खबर यह मिल रही है कि मामले पर शीर्ष अदालत ने दोषी महिला को जमानत दे दी है।

साक्ष्यों की सुरक्षा पर सवाल

मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने पुलिस की इस दलील पर न सिर्फ आश्चर्य जताया बल्कि कड़ी नाराजगी भी व्यक्त की। मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि साक्ष्यों का इस तरह से गायब होना कानून व्यवस्था और राज्य के राजस्व के लिए एक बड़ा नुकसान है। इस दौरान पीठ ने साक्ष्यों की सुरक्षा पर सवाल भी उठाया और कहा कि आखिर पुलिस कस्टडी में रखे गए महत्वपूर्ण साक्ष्य सुरक्षित क्यों नहीं थे? सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है, जहां चूहों द्वारा साक्ष्य नष्ट किए जाने की बात कही गई हो। इससे पहले भी कई मामलों जैसे- नशीले पदार्थों, नकदी के बारे में भी इसी तरह के बहाने बनाए गए हैं, जो व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं।

न्यायालय का फैसला

सुनवाई के दौरान महिला अधिकारी के वकील ने साक्ष्यों के अभाव का हवाला देते हुए तर्क दिया कि मुख्य साक्ष्यों के अभाव में सजा को बरकरार रखना न्यायसंगत नहीं हैं। खासकर जब अपील लंबित हो। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए महिला की सजा को फिलहाल स्थगित कर दिया है। साथ ही उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश भी दिया। सुनवाई करते हुए आगे सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की जब तक अंतिम सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक दोषी को जेल में रखना आवश्यक नहीं है।

यह है पूरा मामला

इस समय चर्चा में रहने वाला यह मामला बिहार का बताया जा रहा है। दरअसल, बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) के पद पर तैनात अरुणा कुमारी को रिश्वत लेने के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी पाया गया था। अधिकारी पर दस हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप था। इस पर पटना हाई कोर्ट ने महिला को सजा सुनाई थी। मामले पर जब देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो राज्य पुलिस पर साक्ष्यों के रखरखाव को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया गया कि रिश्वत में जब्त किए गए नोट को पुलिस के मालखाने में रखा गया था, लेकिन जब अदालत में रिश्वत के रूप में जब्त इन नोटों को में पेश करने का समय आया तो पता चला कि चूहों ने नोटों को पूरी तरह से कुतर डाला है। यानी दोषी को अपराध साबित करने वाला सबसे प्रमुख सबूत अब अस्तित्व में नहीं था। इस मामले पर अदालत ने नाराजगी भी जताई।

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