दतिया उपचुनाव: दलीय जंग से बड़ी भीतरघात की चिंता, नरोत्तम के इर्द-गिर्द सिमटा मुकाबला; रण में मात्र 3 दिन शेष

Datia By Election: दतिया उपचुनाव में 3 दिन शेष, बीजेपी और कांग्रेस को सता रहा भीतरघात का डर, टिकट कटने के बाद भी छाया नरोत्तम मिश्रा का नाम, 40 हजार कुशवाह वोटर्स और आसपा प्रत्याशी बिगाड़ रहे समीकरण।
With just three days left for polling, the Datia Assembly by-election has become as much about internal party dynamics as the contest between political parties, with Dr. Narottam Mishra remaining at the center of the political narrative
दलीय जंग से बड़ी भीतरघात की चिंता (सोर्स- एआई जनरेटेड इमेज)
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Datia By Election Congress-BJP Politics: दतिया विधानसभा उपचुनाव में मतदान के लिए अब महज तीन दिन शेष बचे हैं, लेकिन चुनावी समर की तस्वीर काफी दिलचस्प और जटिल हो चुकी है। धरातल पर सीधी लड़ाई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच दिखने के बजाय, दोनों ही प्रमुख दलों को अपने ही भीतर उठ रही बगावत और 'भीतरघात' का डर ज्यादा सता रहा है।

इस बार चुनाव का मुख्य एजेंडा विकास के दावों से इतर संगठनात्मक गुटबाजी, टिकट वितरण से उपजी नाराजगी और निष्ठा बदलने के आंकलनों के इर्द-गिर्द घूम रहा है।

टिकट कटा, लेकिन चर्चा में नरोत्तम मिश्रा ही

भाजपा ने इस बार छह बार के विधायक और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर संघ पृष्ठभूमि वाले आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है। हालांकि नरोत्तम मिश्रा प्रत्याशी नहीं हैं, फिर भी पूरा चुनाव उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ रहा है।

भाजपा का रुख: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रत्याशी आशुतोष तिवारी अपनी जनसभाओं में लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि यह चुनाव नरोत्तम मिश्रा के कुशल मार्गदर्शन में ही लड़ा जा रहा है, ताकि उनके समर्थकों को एकजुट रखा जा सके।

कांग्रेस का आकलन:नरोत्तम मिश्रा के नामांकन के समय भावुक होने की घटना के बाद कांग्रेस ने अपनी रणनीति बदल ली है। पार्टी ने उन पर सीधे हमले करना बंद कर दिया है। कांग्रेस को उम्मीद है कि टिकट कटने से नाराज समर्थकों का एक बड़ा वर्ग भाजपा से दूरी बना सकता है, जिसका सीधा फायदा उसे मिलेगा।

अपनों के बयानों से असहज हुई कांग्रेस

गुटबाजी का साया केवल भाजपा पर ही नहीं, बल्कि कांग्रेस पर भी मंडरा रहा है। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती प्रचार अभियान से पूरी तरह दूर बने हुए हैं, वहीं अवधेश नायक के समर्थक भी चुनावी नतीजों पर नजर गड़ाए बैठे हैं। राजेंद्र भारती ने अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी घनश्याम सिंह के दो सार्वजनिक बयानों पर खुले तौर पर सवाल खड़े किए हैं, कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर- घनश्याम सिंह द्वारा नरोत्तम मिश्रा की टीम को 'मजबूत' बताकर मुकाबला कठिन करार देने से कार्यकर्ताओं का उत्साह कम हो रहा है। सहानुभूति पर सवाल- नरोत्तम मिश्रा के भावुक होने पर सहानुभूति व्यक्त करना उन मतदाताओं की भावनाओं के खिलाफ है, जिन्होंने 2023 के चुनाव में उनके विरोध में मतदान किया था।

शहरी क्षेत्रों में भाजपा तो गांवों में कांटे की टक्कर

  • शहरी बाजार: मुख्य बाजार के व्यापारियों और आम लोगों का मानना है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार रहने से विकास कार्यों में तेजी आएगी। इस आधार पर शहरी क्षेत्रों में भाजपा बढ़त बनाती दिख रही है।
  • ग्रामीण इलाका: झड़िया और चिरूला जैसे गांवों में मुकाबला बिल्कुल बराबरी का बना हुआ है। ग्रामीण मतदाता किसी दल के बजाय प्रत्याशियों की व्यक्तिगत छवि और जातीय समीकरणों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

आसपा की मौजूदगी ने बढ़ाई कांग्रेस की चिंता

चुनाव में आजाद समाज पार्टी (आसपा) के प्रत्याशी दामोदर यादव के उतरने से समीकरण काफी उलझ गए हैं। 2023 का गणित देखें तो वर्ष 2023 में पास की सेवढ़ा विधानसभा में आसपा को 29 हजार से ज्यादा वोट मिले थे और कांग्रेस वहां मात्र ढाई हजार वोटों के अंतर से चुनाव हार गई थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि दामोदर यादव अनुसूचित जाति (SC) वोट बैंक में सेंध लगाते हैं, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस को झेलना पड़ेगा। यही कारण है कि कांग्रेस प्रत्याशी सार्वजनिक मंचों से दामोदर यादव को भाजपा की 'बी-टीम' करार दे रहे हैं।

40 हजार कुशवाह वोटर्स पर टिकी निगाहें

दतिया में कुल 2.20 लाख मतदाता हैं। इनमें सबसे बड़ा वोट बैंक लगभग 40 हजार कुशवाह समाज का है। इसके अलावा ब्राह्मण- 34 हजार, अहिरवार (एससी)- 28 हजार और यादव 17 हजार कुशवाह मतदाताओं को साधने के लिए भाजपा ने भारत कुशवाह और कांग्रेस ने सिद्धार्थ कुशवाह को दतिया चुनाव का विशेष प्रभारी नियुक्त किया है।

मुख्य स्थानीय मुद्दे और चुनाव आयोग की सख्ती

ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे बड़ा मुद्दा नगर सिंचाई योजना है, जिसे किसान जल्द से जल्द पूरा होते देखना चाहते हैं। इसके अतिरिक्त उनाव रोड और राजगढ़ फाटक क्षेत्र की सरकारी घोषित जमीनों के विवाद का स्थायी समाधान भी जनता की प्रमुख मांग है।

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