
सुप्रीम कोर्ट (सोर्स: सोशल मीडिया)
Supreme Court on Stray Dogs: कुत्तों के व्यवहार को लेकर भी चर्चा हुई। जस्टिस नाथ ने कहा कि कुत्ते इंसानों के डर को पहचान लेते हैं और इसी वजह से काटते हैं। इस पर कुत्तों के पक्ष में दलील दे रहे एक वकील ने असहमति जताई। इस पर जस्टिस ने कहा, “सिर मत हिलाइए, यह बात मैं अपने निजी अनुभव के आधार पर कह रहा हूं।”
वहीं याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि राज्यों द्वारा जो आंकड़े पेश किए गए हैं, उनमें से किसी में यह स्पष्ट नहीं है कि नगर पालिकाओं की ओर से कितने शेल्टर संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में केवल पांच सरकारी शेल्टर हैं और हर शेल्टर में अधिकतम 100 कुत्ते ही रखे जा सकते हैं। ऐसे में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की सख्त जरूरत है।
इससे पहले सुनवाई के दौरान एनिमल वेलफेयर की तरफ से पेश हुए एडवोकेट सीयू सिंह ने आवारा कुत्तों को हटाने या उन्हें शेल्टर होम भेजने पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि कुत्तों को हटाने से चूहों की संख्या बढ़ सकती है। इस पर कोर्ट ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की, “तो क्या बिल्लियां ले आएं?”
इस मामले में पिछले सात महीनों के दौरान अब तक छह बार सुनवाई हो चुकी है। बीते साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया था कि इन जानवरों को तय किए गए शेल्टरों में स्थानांतरित किया जाए।
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7 जनवरी को जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ कई याचिकाओं पर सुनवाई की, हालांकि याचिकाओं की कुल संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। यह मामला 28 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट की ओर से संज्ञान लेने के बाद शुरू हुआ था, जब दिल्ली में आवारा कुत्तों के काटने से फैलने वाली रैबीज बीमारी को लेकर एक मीडिया रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी।






