हरियाणा, उत्तराखंड समेत 22 राज्यों में होगा एसआईआर, चुनाव आयोग का नया फरमान क्या?
SIR News : चुनाव आयोग ने एसआईआर को लेकर नई घोषणा की है। आयोग ने कहा है कि 22 और राज्यों में एसआईआर होगा। इसकी प्रक्रिया अप्रैल से शुरू की जा सकती है। यूपी, बंगाल में एसआईआर का काम जारी है।
- Written By: रंजन कुमार
एसआईआर को लेकर कतार में खड़े लोग। इमेज-प्रतीकात्मक, एआई।
Election Commission New Announcement On SIR : भारत निर्वाचन आयोग (ECI) देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए बड़े स्तर पर ‘ऑपरेशन क्लीन’ चला रहा है। उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत 12 राज्यों में स्पेशल इन्टेंसिव रिवीजन (SIR) का काम सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद अब आयोग ने दिल्ली, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश सहित शेष 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में इस प्रक्रिया को शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
निर्वाचन आयोग ने सभी संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को पत्र लिखकर प्रारंभिक तैयारियां पूरी करने को कहा है। माना जा रहा है कि अप्रैल से इन राज्यों में मतदाता सूची के शुद्धिकरण का दूसरा चरण शुरू हो जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य फर्जी वोटरों को बाहर करना और पात्र युवाओं को जोड़ना है।
इन राज्यों में होगी मतदाता सूची की सघन जांच
इस चरण में दिल्ली (NCT), हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तराखंड, तेलंगाना और पूर्वोत्तर के राज्यों (सिक्किम, त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड, मेघालय) के साथ चंडीगढ़, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव जैसे केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं।
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क्या है SIR और यह क्यों है जरूरी?
स्पेशल इन्टेंसिव रिवीजन (SIR) चुनाव आयोग की एक विशेष प्रक्रिया है। इसके तहत मतदाता सूची को जीरो एरर बनाने का प्रयास किया जाता है। इसकी जरूरत निम्नलिखित कारणों से है:
नामों का मिलान : इसमें वोटरों का मिलान 2002-2004 की मूल सूचियों से किया जाता है। यदि किसी वोटर या उसके वंशज का रिकॉर्ड नहीं मिलता तो उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाता है।
घुसपैठ और पलायन पर लगाम : सीमावर्ती राज्यों में घुसपैठ और बड़े शहरों में बढ़ते पलायन के कारण मतदाता सूची में कई विसंगतियां आ जाती हैं, जिन्हें SIR के जरिए सुधारा जाता है।
अपडेशन : 18 साल की उम्र पूरी कर चुके युवाओं के नाम जोड़ना, मृतकों के नाम हटाना और पते की गलतियों को ठीक करना इसका मुख्य हिस्सा है।
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बिहार से हुई थी शुरुआत
इस विशेष अभियान की नींव पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव से पहले रखी गई थी। बिहार में 24 जून से 25 जुलाई 2025 तक चले इस अभियान के बाद 30 सितंबर 2025 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी, जो काफी सटीक मानी गई। इसी मॉडल को अब पूरे देश में लागू किया जा रहा है।
