वोटर लिस्ट, इमेज-एआई।
Voter Statistics Gujarat 2025 : गुजरात में लोकतंत्र की नींव को मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य चुनाव आयोग ने अब तक का सबसे बड़ा ‘सफाई अभियान’ चलाया है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत आयोग ने राज्य की वोटर लिस्ट का पूरी तरह कायाकल्प कर दिया है। इस सघन जांच के बाद करीब 77 लाख नामों को मतदाता सूची से हटा दिया गया है, जिसके चलते राज्य के कुल वोटरों की संख्या में 13.4% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
प्रशासन का मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट से हर तरह की गड़बड़ी और फर्जीवाड़े को खत्म करना था। जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं-
पलायन : करीब 40 लाख वोटर ऐसे मिले जो स्थायी रूप से अपना पुराना पता छोड़कर दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं।
मृतक : सूची में 18 लाख ऐसे नाम थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी लेकिन वे कागजों पर अब भी ‘वोटर’ बने हुए थे।
लापता : करीब 9.8 लाख लोग वेरिफिकेशन के दौरान अपने दिए गए पते पर मिले ही नहीं।
डुप्लीकेट : लगभग 3.8 लाख लोगों के पास दो-दो वोटर कार्ड थे, जिन्हें अब रद्द कर दिया गया है।
एक तरफ जहां फर्जी नामों पर कैंची चली तो दूसरी तरफ लोकतंत्र की मुख्यधारा में साढ़े नौ लाख नए युवा वोटरों को जोड़ा गया है। यह दिखाता है कि आयोग ने केवल छंटनी नहीं की, बल्कि वास्तविक मतदाताओं को जोड़ने पर भी जोर दिया है।
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वोटरों की संख्या के मामले में अहमदाबाद अभी भी राज्य का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। यहां कुल 49.1 लाख वोटर हैं और इसी जिले में सबसे ज्यादा 1.5 लाख नए नाम भी जोड़े गए हैं। वहीं, छोटे जिलों में डांग ने सबको पीछे छोड़ते हुए वोटरों की संख्या में 2.15% की सर्वाधिक बढ़त दर्ज की है। सूरत, वडोदरा और राजकोट जैसे महानगरों में भी नए युवाओं ने रिकॉर्ड संख्या में पंजीकरण कराया है, जो शहरी क्षेत्रों में बढ़ते राजनीतिक उत्साह का प्रतीक है। चुनाव आयोग के इस कदम से आने वाले चुनावों में न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि वन पर्सन-वन वोट के सिद्धांत को भी मजबूती मिलेगी। बता दें, गुजरात समेत कई राज्यों में अभी एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है।