एसआईआर की प्रक्रिया बदली, अब घर के पास ही हो सकेगी SIR की सुनवाई

SIR Updates: चुनाव आयोग ने एसआईआर अभियान में मतदाताओं को राहत दी है। अब उन मतदाताओं की सुनवाई बड़े मतदान केंद्रों पर होगी, जिनके रिकॉर्ड 2003 की लिस्ट से मेल नहीं खाते या विसंगतियां हैं।
The SIR process has changed, now SIR hearings can be held near home
एसआईआर की प्रक्रिया की चल रही सुनवाई। इमेज-एआई
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SIR News: मतदाता सूची को शुद्ध और सटीक बनाने के लिए चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान में चुनाव आयोग ने जनता को बड़ी राहत दी है। अब उन करोड़ों मतदाताओं को तहसील के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, जिनके रिकॉर्ड में विसंगतियां पाई गई हैं। आयोग ने निर्देश दिया है कि अब सुनवाई दूर-दराज के सरकारी दफ्तरों के बजाय आपके नजदीकी बड़े मतदान केंद्रों पर आयोजित की जाएगी।

दरअसल, चुनाव आयोग 2003 की मतदाता सूची के साथ वर्तमान आंकड़ों का मिलान कर रहा है। इस प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश में 1.04 करोड़ ऐसे मतदाता मिले हैं, जिनकी मैपिंग पुराने रिकॉर्ड से नहीं हो पाई है। 2.22 करोड़ मतदाताओं के डेटा में तार्किक गलतियां मिली हैं।

नोटिस जारी कर मांगे गए थे दस्तावेज

इन सबको नोटिस जारी कर दस्तावेज मांगे गए थे। पहले सुनवाई तहसील स्तर पर हो रही थी, जिससे लोगों को 10 से 15 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा था। राजनीतिक दलों की शिकायत और लोगों की असुविधा को देखते हुए अब निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को यह शक्ति दी गई है कि वे 8-10 पोलिंग बूथों के क्लस्टर पर ही सुनवाई केंद्र बनाएं।

अभियान की तारीखों में बदलाव

चुनाव आयोग ने विशेष अभियान के शेड्यूल में भी एक महत्वपूर्ण संशोधन किया है-

31 जनवरी: इस दिन सभी बूथों पर विशेष अभियान यथावत चलेगा।

1 फरवरी: इस दिन होने वाला अभियान अब रद्द कर दिया गया है।

कारण

1 फरवरी को संत रविदास जयंती का अवकाश है। नगीना के सांसद चंद्रशेखर आजाद ने आयोग को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि जयंती पर लोग कार्यक्रमों में व्यस्त रहेंगे, इसलिए इस दिन अभियान न चलाया जाए। आयोग ने संवेदनशीलता दिखाते हुए इस मांग को स्वीकार कर लिया है।

27 फरवरी तक चलेगा सत्यापन अभियान

आपको चुनाव आयोग की ओर से नोटिस मिला है या आपके पहचान पत्र में त्रुटि है तो 27 फरवरी तक चलने वाले इस सत्यापन अभियान का लाभ जरूर उठाएं। अब केंद्र आपके घर के पास होंगे, इसलिए दस्तावेजों (जैसे आधार, पुराना पहचान पत्र या निवास प्रमाण पत्र) के साथ ईआरओ की तरफ से निर्धारित तिथि पर केंद्र पहुंचें। एक सटीक मतदाता सूची ही मजबूत लोकतंत्र की बुनियाद है।

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