UP SIR Mapping Dispute: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ‘वोटर लिस्ट’ को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) का आरोप है कि भाजपा सरकार ‘फॉर्म-7’ का दुरुपयोग कर विपक्षी समर्थकों, खासकर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग के वोट काट रही है।
फॉर्म-7 और वोट कटने का बड़ा विवाद उत्तर प्रदेश में चल रहे मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान के बीच ‘फॉर्म-7’ विवाद का केंद्र बन गया है। समाजवादी पार्टी का दावा है कि भारतीय जनता पार्टी के लोग इस फॉर्म को बांट रहे हैं और सरकार के संरक्षण में वोट काटने का काम किया जा रहा है। सपा नेताओं का आरोप है कि लखनऊ और नोएडा जैसे शहरों में चोरी-छिपे ये फॉर्म छापे जा रहे हैं और फिर इन्हें सरकार के माध्यम से बंटवाया जा रहा है। इस मामले में सपा अब चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है और एक ज्ञापन सौंपकर इस कथित दुरुपयोग को रोकने की मांग करेगी।
समाजवादी पार्टी के अनुसार, क्षेत्र से जो खबरें और आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। पार्टी का दावा है कि ‘फॉर्म-7’ के जरिए जिन लोगों के वोट काटे जा रहे हैं, उनमें से 80% से ज्यादा लोग पीडीए (PDA) समाज के हैं। सपा का सवाल है कि जब एसआईआर (SIR), मैपिंग और नो मैपिंग जैसी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं और लोगों की पहचान कर ली गई है, तो फिर इन नए फॉर्मों के जरिए किसका वोट काटने की कोशिश की जा रही है? सपा का यह भी आरोप है कि जिला स्तर पर सरकारी आंकड़ों को छुपाया जा रहा है ताकि सही जानकारी बाहर न आ सके।
UP SIR Mapping Dispute: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ‘वोटर लिस्ट’ को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) का आरोप है कि भाजपा सरकार ‘फॉर्म-7’ का दुरुपयोग कर विपक्षी समर्थकों, खासकर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग के वोट काट रही है।
फॉर्म-7 और वोट कटने का बड़ा विवाद उत्तर प्रदेश में चल रहे मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान के बीच ‘फॉर्म-7’ विवाद का केंद्र बन गया है। समाजवादी पार्टी का दावा है कि भारतीय जनता पार्टी के लोग इस फॉर्म को बांट रहे हैं और सरकार के संरक्षण में वोट काटने का काम किया जा रहा है। सपा नेताओं का आरोप है कि लखनऊ और नोएडा जैसे शहरों में चोरी-छिपे ये फॉर्म छापे जा रहे हैं और फिर इन्हें सरकार के माध्यम से बंटवाया जा रहा है। इस मामले में सपा अब चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है और एक ज्ञापन सौंपकर इस कथित दुरुपयोग को रोकने की मांग करेगी।
समाजवादी पार्टी के अनुसार, क्षेत्र से जो खबरें और आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। पार्टी का दावा है कि ‘फॉर्म-7’ के जरिए जिन लोगों के वोट काटे जा रहे हैं, उनमें से 80% से ज्यादा लोग पीडीए (PDA) समाज के हैं। सपा का सवाल है कि जब एसआईआर (SIR), मैपिंग और नो मैपिंग जैसी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं और लोगों की पहचान कर ली गई है, तो फिर इन नए फॉर्मों के जरिए किसका वोट काटने की कोशिश की जा रही है? सपा का यह भी आरोप है कि जिला स्तर पर सरकारी आंकड़ों को छुपाया जा रहा है ताकि सही जानकारी बाहर न आ सके।