BSF ने पाक की 118 चौकियां ध्वस्त कीं, गृह मंत्री शाह बोले- जख्म भरने में वर्षों लगेंगे

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, बीएसएफ देश की पहली रक्षा पंक्ति है जो हर हाल में डटी रहती है। पुंछ हमले में जवाबी कार्रवाई से 118 से ज्यादा पाक पोस्ट तबाह की गईं।
BSF ने पाक कीं 118 चौकियां ध्वस्त की, ग्रह मंत्री शाह बोले- उबरने में वर्षों लगेंगे
बीएसएफ ने हाल ही में एक जवाबी सैन्य ऑपरेशन में 118 से अधिक पाकिस्तानी चौकियों को तबाह और क्षतिग्रस्त कर दिया
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श्रीनगर: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पाकिस्तान के द्वारा पुंछ में हमले की जबावी कार्रवाई करने पर BSF की सराहना की। जम्मू में पुंछ सीमा पर हालिया जवाबी कार्रवाई ने बीएसएफ ने पाकिस्तान को करारा झटका दिया है। सीमा सुरक्षा बल की सटीक रणनीति और साहसिक कार्रवाई के चलते 118 से अधिक दुश्मन चौकियां तबाह हो गई हैं। इस अहम खुलासे के साथ कहा गया है कि पाकिस्तान का निगरानी नेटवर्क पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है और उसे फिर से खड़ा करने में कई साल लग सकते हैं। यह सब तब हुआ जब पाकिस्तान ने भारतीय क्षेत्रों में गोलाबारी कर आतंकवाद विरोधी अभियानों को कमजोर करने की कोशिश की, लेकिन जवाब इतना सटीक मिला कि उसकी योजना खुद बिखर गई।

इस निर्णायक कार्रवाई के पीछे बीएसएफ की सतर्कता, खुफिया तैयारी और सीमाओं पर अडिग डटे रहने का जज़्बा है। रेगिस्तान हो या पहाड़, जंगल हो या बीहड़, हर परिस्थिति में जवानों की सक्रियता ही भारत की सीमाओं की सबसे बड़ी सुरक्षा है। इस बार जवाबी रणनीति पहले से तैयार थी और जैसे ही मौका मिला, उसे पूरी ताकत के साथ लागू कर दुश्मन को जवाब दे दिया गया। यही है भारत की नई नीति पहले चेतावनी, अब करारा जवाब।

जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान को भारी नुकसान

बीएसएफ ने हाल ही में एक जवाबी सैन्य ऑपरेशन में 118 से अधिक पाकिस्तानी चौकियों को तबाह और क्षतिग्रस्त कर दिया है। यह कार्रवाई उस वक्त की गई जब सीमा पार से की जा रही गोलाबारी के जरिए भारत के आतंकवाद विरोधी अभियानों को निशाना बनाया गया। जवानों की सक्रियता से न सिर्फ दुश्मन की चौकियां ढह गईं, बल्कि उसका पूरा निगरानी तंत्र भी खत्म हो गया। यह झटका इतना गहरा है कि दुश्मन को इसे फिर से खड़ा करने में चार से पांच साल लग सकते हैं।

हर मौसम में तैनात है सीमा का सच्चा प्रहरी

बीएसएफ को भारत की पहली रक्षा पंक्ति कहा गया है, जो हर परिस्थिति में सीमाओं पर मुस्तैदी से तैनात रहती है। चाहे मौसम खराब हो या रास्ते दुर्गम, जवानों का हौसला कभी नहीं डगमगाता। हाल में हुए दौरे में यह भी देखने को मिला कि जवानों से मिलने के लिए सड़क मार्ग से यात्रा करने का फैसला लिया गया, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों की जनता के बीच विश्वास और सुरक्षा का संदेश दिया जा सके। यह संदेश भी साफ था—सरकार, जनता और जवान, सभी एक हैं।

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