- Hindi News »
- India »
- Savitribai Phule Fight Against Untouchability Changed Course Of History Know Story On Women Day
सावित्रीबाई फुले की छुआछूत के खिलाफ जंग जिसने बदल दी इतिहास की धारा! जानें उनकी कहानी
Women’s Day 2025: 9 साल की उम्र में विवाह बंधन में बंधीं सावित्रीबाई फुले एक महान समाज सुधारक थीं। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों, विशेषकर महिलाओं और दलितों के साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया।
- Written By: अमन उपाध्याय

सावित्रीबाई फुले, फोटो ( सो. सोशल मीडिया )
Women’s Day Special: भारत की पहली महिला शिक्षिका, सावित्रीबाई फुले, का जन्म महाराष्ट्र के सतारा में हुआ था। उन्होंने महिलाओं और बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया और विधवाओं के उत्थान के लिए भी अनेक प्रयास किए। सावित्रीबाई फुले को आज भी एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में स्मरण किया जाता है, जिन्होंने महिलाओं की स्थिति सुधारने में अहम भूमिका निभाई।
उस समय, जब महिलाओं को समाज में सीमित अधिकार दिए गए थे और उन्हें घर की चारदीवारी में बंद रखा जाता था, सावित्रीबाई फुले ने उन रूढ़िवादी परंपराओं को चुनौती दी। केवल नौ वर्ष की उम्र में विवाह करने के बाद, उन्होंने अपने पति, ज्योतिराव फुले, के साथ मिलकर समाज सुधार की दिशा में कई अहम कार्य किए और नारी सशक्तिकरण की नींव रखी।
महिलाओं के हक में उठाई आवाज
सावित्रीबाई ने महिलाओं के अधिकारों के लिए दृढ़ता से संघर्ष किया। उन्होंने न केवल महिलाओं के हक में आवाज उठाई, बल्कि समाज में उपेक्षित और कमजोर समझे जाने वाले लोगों के लिए भी खड़ी हुईं। सावित्रीबाई ने जातिवाद, छुआछूत और विधवाओं के साथ होने वाले अन्याय का कड़ा विरोध किया। उन्होंने गरीबों और महिलाओं को शिक्षा देने के लिए स्कूलों की स्थापना की और समाज को यह संदेश दिया कि सभी लोग समान हैं और किसी को भी नीचा नहीं समझना चाहिए। समाज सुधारक होने के साथ-साथ, सावित्रीबाई एक प्रतिभाशाली कवयित्री भी थीं। अपनी कविताओं के माध्यम से उन्होंने समाज की बुराइयों और कुरीतियों पर प्रहार किया।
सम्बंधित ख़बरें
17 फरवरी का इतिहास: छत्रपति शिवाजी ने मुगलों को हराकर सिंहगढ़ के किले पर कब्जा किया
मस्जिद बंदर स्टेशन का टीपू सुल्तान से क्या है कनेक्शन? जानें मैसूर के शासक और यहूदी सैनिक का दिलचस्प रहस्य
16 फरवरी का इतिहास : कई बड़ी हस्तियों के नाम के साथ इतिहास में दर्ज
स्वामी दयानंद सरस्वती: अंधविश्वास को तर्क से चुनौती देने वाले वो संन्यासी, जिनकी कहानी लाखों के लिए है प्रेरणा
फेंके जाते थे कीचड़
सावित्रीबाई ने समाज में सुधार लाने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए, लेकिन उनके इन प्रयासों के कारण उन्हें अपने घर से दूर रहना पड़ा। उस समय के ऊँची जाति के लोग उनके कामों को पसंद नहीं करते थे और अक्सर उनका मजाक उड़ाते थे। जब सावित्रीबाई घर से बाहर निकलती थीं, तो उन्हें इस बात का अंदाजा होता था कि लोग उन पर कीचड़ फेंक सकते हैं। इसलिए, वे हमेशा एक अतिरिक्त जोड़ी कपड़े और साफ पानी साथ लेकर चलती थीं।
सावित्रीबाई का मानना था कि समाज में सभी को समान अधिकार मिलने चाहिए। इसी सोच के तहत, उन्होंने अपने घर में एक कुआं खुदवाया ताकि सभी लोग बिना किसी भेदभाव के वहां से पानी पी सकें। उनके इस कदम से लोगों को समानता का महत्व समझने में मदद मिली।
देश की अन्य सभी ख़बरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
सावित्रीबाई न केवल समाज सुधारक थीं, बल्कि एक बुद्धिमान कवयित्री भी थीं। उनकी कविताएं प्रकृति और समाज के लोगों पर आधारित होती थीं। अपनी रचनाओं के माध्यम से वे यह संदेश देना चाहती थीं कि जाति प्रथा को समाप्त किया जाना चाहिए और सभी को बराबरी का हक मिलना चाहिए।
लड़कियों के लिए खोलीं विद्यालय
उस दौर में, जब समाज में लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध थे, सावित्रीबाई फुले ने अपने पति ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर 1848 में महाराष्ट्र के पुणे में देश का पहला बालिका विद्यालय स्थापित किया। इस स्कूल की शुरुआत केवल 9 बालिकाओं के साथ हुई थी। इसके बाद, उन्होंने लड़कियों के लिए 18 और स्कूल खोले। महिला शिक्षा के क्षेत्र में उनके अहम योगदान को देखते हुए, 1852 में ब्रिटिश सरकार ने उन्हें सम्मानित किया। सावित्रीबाई फुले के सम्मान में डाक टिकट जारी किए गए हैं और केंद्र व महाराष्ट्र सरकार ने उनकी स्मृति में कई पुरस्कारों की स्थापना की है।
खुद किया पति का अंतिम संस्कार
सावित्रीबाई फुले ने समाज के सामने साहस और समर्पण की मिसाल कायम की। सन 1890 में पति ज्योतिराव फुले के निधन के बाद, उन्होंने सामाजिक रीतियों को चुनौती देते हुए स्वयं उनके अंतिम संस्कार की सभी विधियां निभाईं और उनकी चिता को अग्नि दी। सावित्रीबाई ने अपने पति के अधूरे सपनों को साकार करने का संकल्प लिया और अपने आप को कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया।
करीब सात साल बाद, 1897 में, महाराष्ट्र में प्लेग महामारी फैल गई। सावित्रीबाई ने निस्वार्थ भाव से पीड़ितों की सेवा में खुद को झोंक दिया। इसी दौरान, वह स्वयं भी इस घातक बीमारी की चपेट में आ गईं और 10 मार्च 1897 को उनका निधन हो गया। अपने अंतिम समय तक उन्होंने सेवा और समर्पण की मिसाल पेश की।
Savitribai phule fight against untouchability changed course of history know story on women day
Get Latest Hindi News , Maharashtra News , Entertainment News , Election News , Business News , Tech , Auto , Career and Religion News only on Navbharatlive.com
लेटेस्ट न्यूज़
T20 World Cup 2026: सुपर-8 का समीकरण हो रहा रोचक, एक ही साथ बाहर हुई ये तीन टीमें, इन देशों ने किया क्वालीफाई
Feb 17, 2026 | 04:48 PM10 करोड़ कमाने वाले NRI भी क्यों नहीं लौटते भारत? इमिग्रेशन एक्सपर्ट ने बताई बड़ी वजह
Feb 17, 2026 | 04:46 PMकर्जमाफी के लिए आगे आएं बकायेदार किसान, बैंक प्रशासन का दस्तावेज जमा करने का आह्वान
Feb 17, 2026 | 04:44 PMएकनाथ शिंदे पर टिप्पणी मामला: विशेषाधिकार समिति के सामने पेश हुए कुणाल कामरा, अब 10 मार्च को होगी अगली सुनवाई
Feb 17, 2026 | 04:43 PMइंडियन रेसिंग फेस्टिवल: गोवा एसेस की ऐतिहासिक जीत, फॅबिएन बनीं रेस जीतने वाली दूसरी महिला ड्राइवर
Feb 17, 2026 | 04:42 PMराफेल से स्कॉर्पीन तक: मोदी और मैक्रों की मीटिंग में तय होगा भारत की सैन्य ताकत का भविष्य
Feb 17, 2026 | 04:40 PMAI का असली इम्तिहान अब शुरू, हाइप नहीं, जनता को सीधा फायदा देने पर सरकार का फोकस
Feb 17, 2026 | 04:40 PMवीडियो गैलरी

धार भोजशाला विवाद: वकीलों की हड़ताल से टली सुनवाई, 18 फरवरी को कोर्ट में खुलेगा एएसआई सर्वे का राज
Feb 17, 2026 | 01:31 PM
इंसानियत शर्मसार! UGC विवाद में छात्राओं को रेप और मर्डर की धमकी, थाने में भी सुरक्षित नहीं बेटियां- VIDEO
Feb 16, 2026 | 10:05 PM
प्रशासन की लापरवाही ने ली मासूम की जान, नागपुर में खुले नाले में गिरा 3 साल का बच्चा; 24 घंटे बाद मिली लाश
Feb 16, 2026 | 09:59 PM
UP विधानसभा में गूंजी युवाओं की आवाज, सपा विधायक ने खोली भर्तियों की पोल; आरक्षण में धांधली का लगाया आरोप
Feb 16, 2026 | 09:51 PM
बिहार विधानसभा में ‘बेचारा’ शब्द पर घमासान! राजद विधायक के बयान ने रामविलास पासवान के अपमान पर छेड़ी नई जंग
Feb 16, 2026 | 09:45 PM
हेल्थ इंश्योरेंस या धोखा? मां के इलाज के लिए दर-दर भटका बेटा, प्रीमियम के बाद भी कंपनी का क्लेम देने से इंकार
Feb 16, 2026 | 09:41 PM














