
नई दिल्ली: राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति (Privilege Committee) ने मंगलवार को 11 निलंबित विपक्षी सांसदों को विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का दोषी ठहराया, लेकिन सभापति जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) ने उनका निलंबन रद्द कर उन्हें बजट सत्र में भाग लेने की अनुमति दे दी। सूत्रों ने यह जानकारी दी है।
बजट सत्र के आरंभ होने से एक दिन पहले राज्यसभा के सभापति को सौंपी अपनी रिपोर्ट में समिति ने यह भी सिफारिश की कि सदस्य पहले जितनी अवधि तक निलंबन का सामना कर चुके हैं उसे ही अवमानना के लिए ‘‘पर्याप्त सजा” के रूप में माना जाना चाहिए।
जिन सांसदों को “विशेषाधिकार के उल्लंघन और सदन की अवमानना का दोषी” ठहराया गया, उनमें जेबी मैथर हिशाम, एल हनुमंतैया, नीरज डांगी, राजमणि पटेल, कुमार केतकर, जी सी चंद्रशेखर, विनय विश्वम, संदोश कुमार पी, एम मोहम्मद अब्दुल्ला, जॉन ब्रिटास और ए ए रहीम शामिल हैं।
समिति ने इस बात को ध्यान में रखते हुए धनखड़ को रिपोर्ट सौंपी कि निलंबित सदस्य बुधवार को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन के दौरान उपस्थित नहीं हो पाएंगे। सूत्रों ने कहा कि सभापति ने निलंबन को रद्द करने के लिए नियमों के तहत निहित अधिकार का इस्तेमाल किया, जिससे सदस्य राष्ट्रपति के अभिभाषण में भाग ले सकेंगे। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान सभापति द्वारा निलंबित किए गए इन 11 सांसदों का मामला विशेषाधिकार समिति को भेजा गया था।






