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Explainer: क्या खतरे में है राघव चड्ढा की सदस्यता? जानें पार्टी छोड़ने या निकाले जाने पर क्या है नियम
- Written By: मनोज आर्या
Raghav Chadha: राघव चड्ढा और AAP में जारी सियासी घमासान के बीच सवाल उठ रहा है कि अगर पार्टी उन्हें निकालती है या वह खुद पार्टी छोड़ते हैं, तो उनकी राज्यसभा सदस्यता जाएगी या फिर बनी रहेगी?

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, (डिजाइन फोटो/ नवभारत लाइव डॉट कॉम)
Raghav Chadha vs AAP Controversy: आम आदमी पार्टी और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीच जारी विवाद फिलहाल रूकने का नाम नहीं ले रहा है। पार्टी ने पहले राघव चड्ढा को राज्यसभा में AAP के डिप्टी लीडर पद से हटाया। इसके बाद राघव चड्ढा ने अपनी ही पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें आम जनता के मुद्दों को उठाने से रोका गया। चड्ढा के इस बयान के तुरंत बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हे निशाने पर लिया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया।
पार्टी और राज्यसभा सांसद में जारी सियासी घमासान के बीच अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या अगर राघव चड्ढा को आम आदमी पार्टी निकाल देती है या वह खुद पार्टी छोड़ का फैसला लेते हैं, तो उनकी राज्यसभा सदस्यता जाएगी या फिर बनी रहेगी? आइए सबकुछ विस्तार से जातने हैं।
अप्रत्यक्ष रूप से होता है राज्यसभा चुनाव
सबसे पहले तो यह जानना जरूरी है कि राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं। यानी इन्हें सीधे तौर पर जनता नहीं चुनती है, बल्कि जनता द्वारा चुने गए विधायक चुनते हैं। जब राज्यसभा सांसद को चुनने के लिए वोटिंग होती है, तब हर एक विधायक को प्रथम, दूसरी और तीसरी वरीयता के लिए सूची दी जाती है और इसी में से उन्हें चुनना होता है।
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भारतीय संविधान में क्या है खास नियम?
राज्यसभा सदस्य का चुनाव सिंगल ट्रांसफरेबल वोट के माध्यम से होता है। ऐसे में एक बार चुने जाने के बाद राज्यसभा सांसद का पद संविधान द्वारा सुरक्षित हो जाता है। यानी एक बार कोई व्यक्ति अगर राज्यसभा का सांसद चुन लिया जाता है तो उस पर पार्टी नेतृत्व का दबाव या मर्जी नहीं चलती है और वह 6 साल तक वह स्वतंत्र होता है।
दलबदल विरोधी कानून के दायरे में सांसद
हालांकि, राज्यसभा सदस्य पर पार्टी व्हिप और दलबदल विरोधी कानून लागू होता है। इसका मतलब यह है कि कोई भी राजनीतिक दल अपने सदस्य को निष्कासित नहीं कर सकती है। लेकिन वह सदन के अंदर अपने सदस्य की भूमिका तय कर सकती है। यानी राज्यसभा सांसद को सदन में बोलने के लिए पार्टी को आवंटित समय में से ही टाइम दिया जाता है।
क्या कहता है कानून, (सोर्स- NotebookLM)
कब जा सकती है सांसद की सदस्यता?
किसी भी राज्यसभा सांसद की सदस्यता केवल दो ही परिस्थितियों में खत्म हो सकती है। या तो सांसद खुद से ही इस्तीफा दे या फिर वह पार्टी व्हिप का उल्लंघन करे और पार्टी बदल ले, इसके बाद दलबदल विरोधी कानून के तहत उसकी सदस्यता अयोग्य घोषित की जा सकती है।
अब राघव चड्ढा का क्या होगा?
अब आते हैं असली मुद्दे यानी राघव चड्ढा (Raghav Chadha) के केस में क्या हो सकता है? अगर आम आदमी पार्टी उन्हें पार्टी से सस्पेंड करती है तो उनकी संसद सदस्यता पर कोई असर नहीं होगा। हालांकि, अगर वह खुद पार्टी छोड़ देते हैं या फिर किसी दूसरे दल में शामिल होते हैं, तब उनकी सदस्यता जा सकती है।
यह भी पढ़ें: पिक्चर अभी बाकी है…राघव चड्ढा ने वीडियो शेयर कर दिखाया ट्रेलर, पंजाब के मुद्दे पर अपनों पर ही दागे सवाल
स्वाति मालीवाल आज भी AAP की सदस्य
आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। स्वाति मालीवाल ने पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, उनके निजी सचिव विभव कुमार और वरिष्ठ नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए थे। मामला कोर्ट तक भी गया। हालांकि, आज तक स्वाति मालीवाल आम आदमी पार्टी की ही सदस्य हैं। वह लगातार अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधती रहती हैं।
Raghav chadha parliament membership rules anti defection law explained
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