

PM Modi Putin Meeting: भारत-रूस संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत गुरुवार शाम देखने को मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का अपने सरकारी आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर डिनर के लिए स्वागत किया। प्रधानमंत्री आवास को इस अवसर पर भारत और रूस के झंडों तथा आकर्षक रोशनी से सजाया गया था, जिससे यह यात्रा की विशेषता खुद ही बयान कर रहा था।
राष्ट्रपति पुतिन दो दिन की राजकीय यात्रा पर भारत पहुंचे हैं। सबसे उल्लेखनीय दृश्य वह था, जब प्रधानमंत्री मोदी खुद उन्हें रिसीव करने के लिए पालम एयरपोर्ट पहुंचे। दोनों नेता हवाई अड्डे से एक ही कार में साथ आए, जो दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी और व्यक्तिगत स्तर पर बनी घनिष्ठता को और मजबूत करती है।
स्वागत के बाद दोनों नेताओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी देखा और कलाकारों की प्रस्तुतियों पर तालियां बजाईं। जुलाई 2024 में पुतिन ने मॉस्को स्थित अपने आधिकारिक आवास नोवो-ओगार्योवो में प्रधानमंत्री मोदी की मेजबानी की थी, और यह नई दिल्ली में आयोजित मुलाकात उस मित्रता का एक और अहम पड़ाव माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पुतिन के आगमन पर खुशी जताते हुए लिखा, “भारत में अपने मित्र राष्ट्रपति पुतिन का स्वागत करते हुए बेहद खुशी हो रही है। मैं गुरुवार शाम और शुक्रवार को होने वाली बातचीत के लिए उत्सुक हूं। भारत-रूस की दोस्ती समय की कसौटी पर खरी उतरी है और दोनों देशों के लोगों के लिए बेहद लाभकारी रही है।”
शुक्रवार को होने वाला 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन खास महत्व रखता है, क्योंकि इस वर्ष दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस दौरान राजनीति, व्यापार, अर्थव्यवस्था, रक्षा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, संस्कृति और मानवीय क्षेत्रों से जुड़े विस्तृत मुद्दों पर चर्चा होगी। साथ ही वैश्वीकरण, क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय हालात पर भी दोनों नेता विचार-विमर्श करेंगे।
राष्ट्रपति भवन में शुक्रवार सुबह पुतिन का औपचारिक स्वागत समारोह होगा, जिसके बाद हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधि स्तर की वार्ता आयोजित की जाएगी। मुलाकात के अंत में संयुक्त बयान जारी होने और कई द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर की उम्मीद है।
पुतिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करेंगे और महात्मा गांधी स्मारक पर पुष्पांजलि देकर अपनी सम्मान श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, यह यात्रा भारत-रूस संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक राजनीति में नई रणनीतिक दिशा तय कर सकती है।