'पटेल साहब ने नेहरू को बताया था देश का आदर्श', कश्मीर विवाद पर पीएम मोदी को खड़गे ने दिया जवाब

Congress President Mallikarjun Kharge ने पीएम मोदी के बयान पर पलटवार किया, जिसमें उन्होंने नेहरू पर कश्मीर विलय की इच्छा पूरी न करने का आरोप लगाया था। जानिए क्या कहा।
Mallikarjun Kharge
मल्लिकार्जुन खड़गे, फोटो- सोशल मीडिया
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PM Narendra Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान के बाद राजनीति गरमा गई है, जिसमें उन्होंने सरदार पटेल की 150वीं जयंती के मौके पर गुजरात में कहा था कि पंडित नेहरू ने पटेल की कश्मीर विलय की इच्छा पूरी नहीं होने दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा नेता हमेशा नेहरू और पटेल में मतभेद बताते हैं, जबकि इतिहास कुछ और कहता है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी के आरोपों का सीधा जवाब देते हुए दोनों महान नेताओं के आपसी सम्मान को याद किया। खड़गे ने कहा कि भाजपा के नेता हमेशा यह कहते हैं कि पंडित नेहरू और सरदार पटेल में मतभेद था।

पीएम मोदी ने क्या आरोप लगाए थे?

खड़गे का पलटवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के बाद आया है, जो उन्होंने शुक्रवार को सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के मौके पर गुजरात के एकता नगर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिया था। पीएम मोदी ने आरोप लगाया था कि सरदार पटेल चाहते थे कि कश्मीर का विलय भी बाकी रियासतों की तरह ही हो, लेकिन पंडित नेहरू ने उनकी वह इच्छा पूरी नहीं होने दी। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि कश्मीर को अलग संविधान और अलग निशान देकर बांट दिया गया था, और कांग्रेस की इस गलती की आग में देश दशकों तक जलता रहा। खड़गे ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि नेहरू ने खुद सरदार पटेल को 'भारत की एकता के शिल्पी' बताया था। वहीं, सरदार वल्लभभाई पटेल ने भी पंडित नेहरू को 'देश के आदर्श और जनता का नेता' कहा था।

संविधान और नौकरशाही पर सरदार पटेल की बात

कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने देश को एक करने में सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने याद दिलाया कि पटेल ने संविधान सभा में मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) से जुड़े अपने विचार रखे और सुनिश्चित किया कि वे संविधान में जगह पाएं। खड़गे ने यह भी बताया कि वह सरदार पटेल की बात याद दिलाना चाहते हैं, जो उन्होंने 4 फरवरी 1948 को लिखे गए एक पत्र में कही थी।

नौकरशाही के संदर्भ में बात करते हुए खड़गे ने कहा कि पहले के समय में लोग नौकरशाही में रहते हुए एक संगठन विशेष की विचारधारा फैलाते थे। उन्होंने बताया कि ऐसे में जमात-ए-इस्लामी समेत एक और संगठन के साथ सरकारी कर्मचारियों के जुड़ाव पर रोक लगाई गई थी।

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