Pahalgam Terror Attack Anniversary Operation Mahadev Details Le T Terrorists Killed
पहलगाम के गुनहगारों का सेना ने ऐसे किया था अंत, दाछीगाम के जंगलों में बिछ गई थी लाशें! ऑपरेशन महादेव की कहानी
Pahalgam Terror Attack: पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर सेना ने 'ऑपरेशन महादेव' का ब्यौरा साझा किया। 93 दिनों के कठिन अभियान के बाद दाछीगाम के जंगलों में लश्कर के 3 आतंकियों को सेना ने ढेर किया था।
Pahalgam Terror Attack Anniversary: पहलगाम आतंकी हमले को 22 अप्रैल को एक साल पूरा होने जा रहा है। इस हमले में बैसरन घाटी में घूमने आए पर्यटकों पर आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग की थी, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी। इस घटना से पूरे देश में गुस्सा फैल गया था। हमलावरों ने लोगों का नाम और धर्म पूछकर उनके परिवार के सामने ही गोली मार दी थी, जिससे यह घटना और भी भयावह बन गई।
इस हमले के बाद भारतीय सेना के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई और भारत-पाकिस्तान संबंधों में भी तनाव बढ़ गया। इसके जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाते हुए पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के 9 ठिकानों को नष्ट किया, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया।
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When boundaries of humanity are crossed, the response is decisive.Justice is Served.
हालांकि निर्णायक सफलता 28 जुलाई 2025 को ‘ऑपरेशन महादेव’ के तहत मिली, जब सुरक्षाबलों ने हमले में शामिल तीन आतंकियों को मार गिराया। सेना के अनुसार, ये आतंकी Dachigam National Park के घने जंगलों में छिपे हुए थे।
बरसी से दो दिन पहले सेना ने ऑपरेशन महादेव से जुड़ी अहम जानकारी साझा की। बताया गया कि हमले के कुछ घंटों के भीतर ही सुरक्षाबल मौके पर पहुंच गए थे और जांच शुरू कर दी गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों और खुफिया जानकारी के आधार पर तीन आतंकियों की पहचान की गई, जो लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे।
दाछीगाम के घने और दुर्गम जंगलों में छिपे थे आतंकी
इन आतंकियों की पहचान सुलेमान शाह, हमजा अफगानी और जिब्रान भाई के रूप में हुई। इसके बाद बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेर लिया और आतंकियों के भागने के रास्ते बंद कर दिए।
आतंकी हप्तानार, बुगमार और त्राल जैसे इलाकों से होते हुए आखिरकार दाछीगाम के घने और दुर्गम जंगलों में छिप गए। यह इलाका ऊंचाई और घने जंगलों के कारण ऑपरेशन के लिए काफी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन सुरक्षाबलों ने लगातार दबाव बनाए रखा।
93 दिनों की लगातार तलाश के बाद सफलता
करीब 300 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें सेना, पुलिस और अन्य एजेंसियों ने मिलकर काम किया। ड्रोन और आधुनिक तकनीक की मदद से इलाके की निगरानी की गई और धीरे-धीरे ऑपरेशन का दायरा कम किया गया।
10 जुलाई 2025 तक ऑपरेशन निर्णायक चरण में पहुंच गया और लिदवास, हरवन व दाछीगाम क्षेत्रों में कार्रवाई तेज कर दी गई। करीब 93 दिनों की लगातार तलाश के बाद 28 जुलाई को अंतिम अभियान चलाया गया, जिसमें पैरा स्पेशल फोर्सेस ने कठिन रास्तों पर घंटों पैदल चलकर आतंकियों को घेर लिया और मुठभेड़ में तीनों को मार गिराया।
‘ऑपरेशन महादेव’ को सेना की दृढ़ता और प्रतिबद्धता का उदाहरण माना जा रहा है। इस कार्रवाई से यह संदेश गया कि आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख जारी रहेगा। वहीं, हमले की पहली बरसी से पहले जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सीमावर्ती इलाकों समेत संवेदनशील स्थानों पर सेना और पुलिस के जवान विशेष सतर्कता बरत रहे हैं।
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