लालू फैमिली ने आपराधिक गिरोह की तरह काम किया, प्वाइंट्स में समझें कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें

Charges Framed in Land For Jobs Scam Case: जमीन के बदले नौकरी घोटाले मामले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को दिल्ली की अदालत से बड़ा झटका लगा है। प्लाइंट्स में समझें कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें।
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लालू फैमिली
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Rouse Avenue Court on Land for Job Scam: ज़मीन के बदले नौकरी घोटाले से जुड़े CBI मामले में दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के खिलाफ बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस मामले में RJD प्रमुख लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, दोनों बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव, बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव समेत कुल 40 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है।

विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने अपने फैसले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि लालू यादव और उनके परिवार ने एक आपराधिक गिरोह यानी क्रिमिनल सिंडिकेट की तरह काम किया और सरकारी नौकरियों को सौदेबाजी का जरिया बनाकर ज़मीन हासिल करने की एक व्यापक साजिश रची गई। कोर्ट के मुताबिक, इस स्तर पर आरोप तय करने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।

कोर्ट के फैसले की प्रमुख बातें

  • कोर्ट की सख्त टिप्पणी- दिल्ली के राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने कहा कि ज़मीन के बदले नौकरी मामले में लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार एक आपराधिक गिरोह (क्रिमिनल सिंडिकेट) की तरह काम कर रहा था। अदालत के अनुसार, यह कोई अलग-अलग घटनाएं नहीं थीं, बल्कि सरकारी नौकरियों का इस्तेमाल कर परिवार के लिए संपत्ति हासिल करने की एक सुनियोजित और व्यापक साजिश थी।
  • सरकारी नौकरी को सौदेबाजी का हथियार बताया- कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि लालू प्रसाद यादव ने रेलवे में नियुक्तियों को एक तरह के “बार्गेनिंग टूल” के रूप में इस्तेमाल किया। इसके बदले उनके परिवार के सदस्यों, पत्नी, बेटों और बेटियों के नाम पर अचल संपत्तियां और ज़मीनें हासिल की गईं, वह भी कथित तौर पर नाममात्र कीमत पर।
  • आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार- न्यायालय ने कहा कि इस स्तर पर दोष सिद्ध करना आवश्यक नहीं है, लेकिन उपलब्ध सबूतों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह मानने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है कि भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश को अंजाम दिया गया। इसी आधार पर अदालत ने आरोप तय करने का फैसला लिया।
  • किन धाराओं में आरोप तय हुए- कोर्ट ने कुल 41 आरोपियों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 13(2) और 13(1)(d) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है, जबकि 52 आरोपियों को पर्याप्त सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
  • परिवार के सदस्यों की भूमिका पर टिप्पणी- अदालत ने माना कि इस साजिश में केवल लालू यादव ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव, तथा बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव भी शामिल थीं, जिनके नाम पर ज़मीन ट्रांसफर किए जाने के आरोप हैं।

2004 से 2009 के बीच रची गई साजिश

CBI का दावा है कि यह साजिश 2004 से 2009 के बीच रची गई जब लालू यादव रेल मंत्री थे। जांच एजेंसी के अनुसार, इस दौरान लगभग सभी मामलों में नौकरी देने से पहले ही जमीनें ट्रांसफर की गईं और अधिकांश मामलों में गिफ्ट डीड तैयार की गई थीं। CBI ने यह भी कहा कि जब लालू यादव रेल मंत्री थे, तो उनके करीबी भोला यादव ने गांव में जाकर लोगों से कहा कि अगर वे अपने परिजनों को नौकरी दिलवाना चाहते हैं तो अपनी ज़मीन लालू यादव  के परिवार वालों के नाम कर दें। जिन लोगों ने अपनी ज़मीन लालू परिवार के नाम की, उन्होंने दावा किया कि उन्हें इसके बदले नकद भुगतान किया गया था।

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