Guruwar Vrat: गुरुवार का व्रत करते समय इन नियमों का रखें ख्याल, वरना नहीं मिलेगा व्रत का पूरा फल

Guruwar Vrat Rules: गुरुवार का व्रत करने से भगवान विष्णु और देवगुरू वृहस्पति की कृपा बनी रहती है। यह व्रत करने से गुरु दोष शांत होता है और शादी-विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती है।
Guruwar Vrat ki Puja Vidhi For luck, success and wealth
गुरुवार व्रत (साभार. सोशल मीडिया)
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Guruwar Vrat Ke Fayde: सनातन धर्म में भगवान विष्णु को जगत का पालन करने वाला यानी पालनहारी देवता माना जाता है। भगवान विष्णु को एकादशी तिथि और गुरुवार का दिन समर्पित किया गया है। यदि आप जीवन में सुख, समृद्धि और ज्ञान की कामना रखते हैं, तो गुरुवार का व्रत और पूजा आपके लिए प्रभावी हो सकता है।

अगर आपकी कुंडली में गुरु मजबूत हैं, तो मान-सम्मान और तरक्की आपके कदम चूमती है। इसके विपरीत, अगर गुरु कमजोर हों, तो बनते काम बिगड़ने लगते हैं और आर्थिक तंगी घेर लेती है। हमारे शास्त्रों में अच्छी बात यह है कि गुरु को मनाने और उन्हें खुश करने के बेहद आसान और सटीक उपाय बताए गए हैं।

गुरुवार व्रत की पूजन विधि

  • गुरुवार के व्रत को पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ करने से ही पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। यदि आप भी इस व्रत को करने की सोच रही हैं, तो इन नियमों का पालन करें।
  • सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की प्रतिमा के सामने व्रत का संकल्प लें।
  • गुरुवार के दिन केले के पेड़ में साक्षात विष्णु जी का वास माना जाता है। पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें और दीपक जलाएं।
  • पूजा में पीले फूल, चने की दाल, हल्दी, गुड़, केला और पपीता अर्पित करना अत्यंत शुभ होता है।
  • पूजा के दौरान ‘ऊं बृं बृहस्पतये नमः’ मंत्र का जाप करें।
  • बृहस्पति देव की व्रत कथा सुनना या पढ़ना अनिवार्य माना जाता है।

व्रत के लाभ

नियमित रूप से गुरुवार का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में कई बदलाव आते हैं। इससे आर्थिक लाभ व तंगहाली दूर होती है और धन के नए मार्ग खुलते हैं। पूजा-पाठ व्यक्ति को मानसिक शांति देते हैं। व्यक्ति का आध्यात्मिक स्तर ऊंचा होता है और निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होती है। गुरूवार का व्रत करने से वैवाहिक जीवन की समस्याएं भी समाप्त होती हैं। विवाह योग्य जातकों के विवाह के योग बनते हैं और व पारिवारिक जीवन में मधुरता आती है।

गुरूवार के व्रत में क्या न करें

बृहस्पतिवार की पूजा में नमक का त्याग करना चाहिए। इसके पीछे धार्मिक और ज्योतिषीय दोनों कारण हैं, यह व्रत भगवान विष्णु की सात्विक आराधना को समर्पित है, इसलिए नमक को तामसिक माना जाता है, जो मन की शांति और एकाग्रता में बाधा डालता है। इसके साथ ही साधारण नमक का संबंध राहु से माना गया है। अगर गुरु के व्रत में नमक का सेवन किया जाए, तो यह बृहस्पति के शुभ प्रभाव को कम कर देता है, जिससे जातक को अपनी पूजा और तपस्या का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता है। इसके अलावा,

  • बाल, दाढ़ी या नाखून न काटें।
  • घर में पोंछा लगाना या कपड़े नहीं धोने चाहिए।
  • महिलाएं बाल न धोएं।
  • सिलाई मशीन का उपयोग न करें।
  • चूंकि केले की पूजा की जाती है, इसलिए केले का सेवन न करें।
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